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अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा समझौता
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को दोनों देशों के बीच संबंधों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए समझौता ज्ञापन (MoU) को मंजूरी दी है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच कई विवादित मुद्दों पर बातचीत का नया रास्ता खुल गया है।
60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य
समझौते के तहत अमेरिका और ईरान ने अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में सभी जटिल मुद्दों को सुलझाना आसान नहीं होगा, लेकिन दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा फैसला
समझौते का सबसे चर्चित हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है।
ईरान ने भरोसा दिया है कि अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी और इस दौरान किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान को मिलेगा 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड
समझौते के तहत ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर यानी करीब 28 लाख करोड़ रुपए के फंड की रूपरेखा तैयार की गई है।
हालांकि यह राशि तुरंत जारी नहीं होगी। अंतिम समझौते और अन्य शर्तों के पूरा होने के बाद ही इस फंड को लागू किया जाएगा।
आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
अमेरिका ने संकेत दिया है कि अंतिम समझौते के बाद ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से हटाए जा सकते हैं।
इसमें तेल निर्यात, बैंकिंग लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी पाबंदियों में राहत शामिल हो सकती है।
परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
समझौते में ईरान ने एक बार फिर आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
साथ ही संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार और परमाणु गतिविधियों की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की भूमिका पर भी सहमति बनी है।
यही मुद्दा वर्षों से अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद रहा है।
दोनों देश नहीं करेंगे आंतरिक मामलों में दखल
समझौते के अनुसार अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे।
दोनों देशों ने एक-दूसरे के घरेलू राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का भी वादा किया है।
नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
इससे ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल निर्यात के नए रास्ते खुल सकते हैं।
फ्रीज की गई संपत्तियों को लेकर भी राहत
समझौते में यह भी कहा गया है कि ईरान की फ्रीज की गई कुछ संपत्तियों और धनराशि तक पहुंच बहाल करने पर बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है।
मध्य पूर्व की राजनीति पर क्या असर होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है।
हालांकि इजराइल और कुछ अन्य क्षेत्रीय देशों की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। कई मुद्दों पर अंतिम सहमति अगले दौर की वार्ताओं में ही सामने आएगी।
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता केवल दो देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं है। इसका असर वैश्विक तेल बाजार, मध्य पूर्व की सुरक्षा, परमाणु राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।
अब दुनिया की नजर अगले 60 दिनों पर होगी, जब दोनों देश अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
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