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ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, भारतीय मूल के श्रीराम कृष्णन ने AI पॉलिसी एडवाइजर पद छोड़ने का किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति को आकार देने वाले भारतीय मूल के टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ श्रीराम कृष्णन ने व्हाइट हाउस छोड़ने का ऐलान किया है। पिछले 18 महीनों से AI रणनीति पर काम कर रहे कृष्णन इस महीने के अंत तक अपना पद छोड़ देंगे।

Sriram Krishnan
Updated: 6/7/2026, 1:27:57 PM
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ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, श्रीराम कृष्णन ने AI सलाहकार पद छोड़ने का किया ऐलान

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अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति को दिशा देने वाले भारतीय मूल के टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ श्रीराम कृष्णन ने व्हाइट हाउस में अपने कार्यकाल को समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि वह इस महीने के अंत तक AI पॉलिसी एडवाइजर का पद छोड़ देंगे।

उनके इस फैसले को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि AI नीति और टेक्नोलॉजी रणनीति के कई अहम फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा?

श्रीराम कृष्णन ने अपने बयान में कहा कि वह सरकारी सेवा से कुछ समय का ब्रेक लेना चाहते हैं। उन्होंने लिखा कि पिछले 18 महीनों में उन्हें अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सामने मौजूद AI से जुड़ी चुनौतियों को करीब से समझने का मौका मिला।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रेक के बाद वह AI क्षेत्र में अमेरिका के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों पर काम करना जारी रखेंगे।

ट्रंप और डेविड सैक्स का किया धन्यवाद

अपने संदेश में कृष्णन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि उनके साथ काम करना सम्मान की बात रही।

उन्होंने व्हाइट हाउस के AI और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया। कृष्णन के अनुसार, अमेरिका को AI की वैश्विक दौड़ में आगे बनाए रखने में सैक्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

AI नीति तैयार करने में निभाई अहम भूमिका

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व्हाइट हाउस में अपने कार्यकाल के दौरान श्रीराम कृष्णन ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया।

उन्होंने अमेरिकी AI एक्शन प्लान के प्रारूप को तैयार करने, AI एक्सेलरेशन पार्टनरशिप को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय AI नीति ढांचे से जुड़े कई फैसलों में योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलनों और विभिन्न देशों के साथ तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।

भारत से लेकर फ्रांस तक किया प्रतिनिधित्व

श्रीराम कृष्णन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने भारत, फ्रांस, ब्रिटेन और मध्य पूर्व में आयोजित AI सम्मेलनों और कूटनीतिक बैठकों में हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों में उन्होंने अमेरिकी AI इकोसिस्टम और तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया।

आगे क्या करेंगे श्रीराम कृष्णन?

कृष्णन का कहना है कि AI का तेजी से विकास नई चुनौतियां लेकर आ रहा है।

ऊर्जा, डेटा सेंटर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और आम लोगों तक AI के लाभ पहुंचाने जैसे कई मुद्दों पर अभी काफी काम किया जाना बाकी है। उन्होंने संकेत दिया कि अब वह ऐसे संस्थानों और पहलों पर काम करना चाहते हैं जो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को इन चुनौतियों से निपटने में मदद करें।

डेविड सैक्स ने की तारीफ

कृष्णन के इस्तीफे की घोषणा के बाद डेविड सैक्स ने उनके योगदान की खुलकर सराहना की।

उन्होंने कहा कि श्रीराम कृष्णन में तकनीकी समझ, नीति निर्माण क्षमता और रणनीतिक सोच का दुर्लभ मेल देखने को मिलता है। सैक्स ने यह भी कहा कि प्रशासन के बाहर रहने के बावजूद कृष्णन आगे भी सलाहकार के रूप में जुड़े रह सकते हैं।

सिलिकॉन वैली और वॉशिंगटन के बीच मजबूत कड़ी

श्रीराम कृष्णन को लंबे समय से सिलिकॉन वैली और अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता रहा है।

व्हाइट हाउस में आने से पहले उन्होंने Microsoft, X (पूर्व Twitter), Meta और Snap जैसी बड़ी टेक कंपनियों में वरिष्ठ भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा वे टेक्नोलॉजी निवेशक और इंडस्ट्री विश्लेषक के रूप में भी पहचान रखते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

AI आज अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

ऐसे समय में जब दुनिया भर के देश AI क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रहे हैं, श्रीराम कृष्णन जैसे अनुभवी विशेषज्ञ का प्रशासन से अलग होना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह AI से जुड़े मुद्दों पर काम करना जारी रखेंगे, लेकिन अब उनकी भूमिका सरकार के बाहर से होगी।

श्रीराम कृष्णन का व्हाइट हाउस छोड़ने का फैसला अमेरिका की AI नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पिछले 18 महीनों में उन्होंने AI रणनीति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी नीति निर्माण में अहम योगदान दिया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकारी भूमिका से बाहर आने के बाद वह AI क्षेत्र में किस नई दिशा में काम करते हैं।

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