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70 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट मामले में STF की कार्रवाई
मध्य प्रदेश में कथित फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मामले में छठे आरोपी को गिरफ्तार किया है। STF की भोपाल टीम ने गिरफ्तार आरोपी की पहचान गया प्रसाद गौतम, पिता कच्ची राम, निवासी बनवार चीनौर, भितरवार, ग्वालियर के रूप में की है।
पुलिस जांच के अनुसार यह मामला करीब 70 बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने से जुड़ा है। STF का आरोप है कि गौतम ने ऐसे लोगों के आवासीय पते का सत्यापन किया, जिन्हें वह पहले से जानता तक नहीं था।
जांच में यह भी सामने आया है कि उसने पासपोर्ट जारी कराने की प्रक्रिया में गवाह की भूमिका निभाई।
डबरा से जारी 17 पासपोर्ट में एक ही गवाह होने का आरोप
STF के मुताबिक डबरा क्षेत्र से इस मामले में 17 पासपोर्ट जारी हुए थे और इन सभी में गया प्रसाद गौतम कथित तौर पर गवाह बना था।
पुलिस का कहना है कि गौतम की आवेदकों से पहले से कोई पहचान या परिचय नहीं था। इसके बावजूद उसने उनके आवासीय पते का सत्यापन किया और पासपोर्ट प्रक्रिया में गवाही दी।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन पासपोर्ट आवेदकों और आरोपी के बीच संपर्क किस माध्यम से हुआ और कथित फर्जी सत्यापन की प्रक्रिया में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
2019 में बौद्ध धर्म अपनाने का दावा
STF की जांच के अनुसार गया प्रसाद गौतम ने 2019 में बौद्ध धर्म अपनाया था। इसके बाद 2021-22 के दौरान वह ग्वालियर के डबरा स्थित आंबेडकर पार्क, सिमरिया टेकरी में बौद्ध भिक्षु के रूप में रहने लगा था।
स्थानीय निवासी होने के कारण उसने वर्ष 2022 में वहां बौद्ध भिक्षुओं से संबंधित एक कार्यक्रम का आयोजन भी किया था।
इसी कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात मैत्रानंद भिक्खु उर्फ रियाल चौधरी भिक्खु से होने की बात STF ने कही है।
STF का आरोप- मैत्रानंद के कहने पर किया सत्यापन
जांच एजेंसी के मुताबिक मैत्रानंद भिक्खु के कहने पर गया प्रसाद ने कथित तौर पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के आवासीय पते का सत्यापन किया।
STF का आरोप है कि इन लोगों से व्यक्तिगत परिचय नहीं होने के बावजूद गौतम ने पासपोर्ट प्रक्रिया में उनके गवाह के तौर पर भूमिका निभाई।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और आपसी संपर्क की जांच कर रही है।
17 आवेदनों में एक ही पता दर्ज होने का दावा

जांच में सामने आए एक महत्वपूर्ण बिंदु के मुताबिक जिन लोगों के पासपोर्ट के लिए गौतम ने कथित तौर पर सत्यापन और गवाही दी, उनके आवेदन में एक ही आवासीय पता दर्ज था।
यह पता सिमरिया टेकरी, डबरा, जिला ग्वालियर बताया गया है।
STF के मुताबिक अलग-अलग लोगों के लिए एक ही पते का इस्तेमाल और एक ही व्यक्ति द्वारा उनके सत्यापन में गवाह बनना जांच का अहम हिस्सा है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
STF ने कई धाराओं में दर्ज किया मामला
इस मामले में STF भोपाल ने Crime No. 09/2026 दर्ज किया है। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के साथ पासपोर्ट, विदेशी नागरिकों और नागरिकता से जुड़े कानूनों के प्रावधान लगाए हैं।
मामले में निम्न धाराओं का उल्लेख किया गया है:
- IPC की धारा 420 — धोखाधड़ी
- IPC की धारा 465 — जालसाजी
- IPC की धारा 467 — महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी
- IPC की धारा 468 — धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी
- IPC की धारा 471 — फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना
- IPC की धारा 120-B — आपराधिक साजिश
- Passport Act की धारा 12
- Foreigners Act की धारा 14
- Citizenship Act की धारा 17
जांच में अब आगे क्या?
गया प्रसाद गौतम की गिरफ्तारी के बाद STF के सामने अब इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच का सवाल है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, आवेदकों के भारत में रहने की जानकारी कैसे दर्ज की गई और पासपोर्ट प्रक्रिया में सत्यापन से जुड़े अन्य स्तरों पर किसकी भूमिका रही।
70 बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े बताए जा रहे इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों और उनके बीच संभावित कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
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