Updated

MP Rainfall 2026: 5 साल में सबसे कम बारिश, 30 जिलों में कोटा अधूरा; गेहूं-सोयाबीन पर असर का डर

शॉर्ट समरी: मध्य प्रदेश में 2026 का मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ खत्म हुआ। प्रदेश में करीब 904 मिमी यानी 35.6 इंच बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य कोटे का 95.4% है। 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश नहीं हुई और 11 जिलों में बारिश सामान्य की 80% से भी कम रही। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश में दिखाई दिया।

MP Rainfall 2026
Updated: 10/3/2026, 5:05:42 AM
Fact Checked

This report has been reviewed.

शॉर्ट समरी: मध्य प्रदेश में 2026 का मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ खत्म हुआ। प्रदेश में करीब 904 मिमी यानी 35.6 इंच बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य कोटे का 95.4% है। 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश नहीं हुई और 11 जिलों में बारिश सामान्य की 80% से भी कम रही। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश में दिखाई दिया।

MP Rainfall 2026: 5 साल में सबसे कम बारिश

article

राज्य का सामान्य मानसूनी आंकड़ा करीब 37.3 इंच माना जाता है। 30 सितंबर तक 904 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य का 95.4% है। IMD की श्रेणी में 96% से 104% बारिश को सामान्य माना जाता है, इसलिए राज्य का कुल आंकड़ा सामान्य से थोड़ा नीचे रहा।

NewsSukhDukh के अनुसार, राज्य का औसत आंकड़ा बहुत ज्यादा कमजोर नहीं दिखता, लेकिन असली चिंता बारिश के असमान वितरण की है। कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई।

30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं

प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में सामान्य बारिश नहीं हुई। इनमें 11 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य की 80% से भी कम बारिश दर्ज हुई। अलीराजपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रहा, जहां सामान्य बारिश के मुकाबले करीब आधी बारिश ही हुई।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में स्थिति ज्यादा कमजोर रही। इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का घाटा दर्ज किया गया। अलीराजपुर में करीब 50% की कमी और इंदौर में करीब 26% की कमी दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी।

वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश अपेक्षाकृत बेहतर रही। यही वजह है कि पूरे प्रदेश का औसत आंकड़ा कुछ हद तक संतुलित दिखाई देता है।

बारिश कम नहीं, सबसे बड़ी समस्या रही अनियमित बारिश

article

इस मानसून में कई इलाकों में बारिश लंबे अंतराल के बाद हुई। कहीं कम समय में तेज बारिश हुई तो कहीं कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।

इस तरह की बारिश खेती और भूजल रिचार्ज के लिए चुनौती बन सकती है। लगातार बारिश होने पर पानी धीरे-धीरे जमीन में जाने का मौका मिलता है, जबकि लंबे ड्राई स्पेल के बाद अचानक तेज बारिश का बड़ा हिस्सा बहाव में चला जाता है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल बारिश के सिस्टम कई बार कमजोर रहे और लगातार कई दिनों तक बारिश वाला दौर कम देखने को मिला।

सोयाबीन और गेहूं पर पड़ सकता है असर

मध्य प्रदेश में सोयाबीन खरीफ की प्रमुख फसलों में शामिल है। मालवा और पश्चिमी हिस्से में इसकी बड़ी पैदावार होती है। इस क्षेत्र में बारिश की कमी और लंबे अंतराल का असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अर्थशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र विश्वकर्मा के अनुसार, पश्चिमी हिस्से में कम बारिश का असर फसलों पर पड़ सकता है। उनके आकलन के मुताबिक सोयाबीन की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है और इसका असर ग्रामीण आय तथा बाजार पर भी पड़ सकता है।

रबी सीजन में गेहूं और चना की सिंचाई भी महत्वपूर्ण होगी। अगर भूजल रिचार्ज कम रहा तो जिन किसान क्षेत्रों में सिंचाई बोरवेल पर निर्भर है, वहां पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है।

हालांकि, फसल उत्पादन में वास्तविक कमी कितनी होगी, इसका आकलन फसल कटाई और कृषि विभाग के सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।

बांधों में अभी स्थिति पूरी तरह चिंताजनक नहीं

बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद प्रदेश के बड़े जलाशयों की स्थिति फिलहाल औसत स्तर पर बनी हुई है। राज्य के 54 प्रमुख बांधों में औसत जलभराव 89.32% दर्ज किया गया है और 35 बांध 90% से ज्यादा भर चुके हैं।

इससे यह साफ है कि कम बारिश का मतलब पूरे मध्य प्रदेश में तत्काल जल संकट होना नहीं है। लेकिन पश्चिमी जिलों में स्थानीय जल उपलब्धता और रबी सिंचाई की जरूरतों को देखते हुए आगे जल प्रबंधन महत्वपूर्ण रहेगा।

जल संसाधन विभाग ने 90% से अधिक भरे बांधों की विशेष निगरानी और पानी की आवक-निकासी पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

शहरों में पेयजल को लेकर क्यों बढ़ सकती है चिंता?

article

कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहता। बारिश कम होने पर तालाब, छोटे जलाशय और भूजल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि भोपाल जैसे कुछ शहरों में इस साल पर्याप्त बारिश हुई है, लेकिन इंदौर और उज्जैन जैसे पश्चिमी शहरों में बारिश की कमी चिंता का विषय है। इंदौर में मानसून के दौरान सामान्य से करीब 26% कम बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी।

इसलिए अगले कुछ महीनों में पेयजल, सिंचाई और भूजल स्तर की निगरानी जरूरी होगी।

बिजली उत्पादन पर भी असर की संभावना

मध्य प्रदेश में कई जल विद्युत परियोजनाएं बांधों और जलाशयों पर निर्भर हैं। बारिश और जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर आगे बिजली उत्पादन की स्थिति तय होगी।

फिलहाल अधिकांश बड़े जलाशयों में पर्याप्त जलभराव होने के कारण तत्काल बड़ा संकट दिखाई नहीं देता, लेकिन कम बारिश वाले पश्चिमी क्षेत्रों में लंबे समय तक पानी के प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

NewsSukhDukh की नजर में पूरी तस्वीर

मध्य प्रदेश की इस साल की बारिश को सिर्फ 'कम बारिश' कहना पूरी तस्वीर नहीं बताता। राज्य में कुल बारिश सामान्य से केवल कुछ प्रतिशत नीचे रही, लेकिन जिलों के बीच बड़ा अंतर रहा।

एक तरफ कुछ जिलों में भारी बारिश और बांधों में अच्छा जलभराव रहा, वहीं दूसरी तरफ अलीराजपुर जैसे जिलों में सामान्य बारिश का आधा भी नहीं हो पाया। ऐसे में आगे की चुनौती रबी फसल, भूजल रिचार्ज, स्थानीय पेयजल और सिंचाई प्रबंधन की होगी।

Sources & References
  • Source
Get Daily News Updates

Join our newsletter and receive the latest breaking news, technology, politics and world updates directly in your inbox.

Comments
Comments feature UI is ready. Backend moderation/API can be connected later.
About the author

ayush

Senior content writer
Most Read