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अक्सर हम महापुरुषों को बचपन से ही एकदम आदर्श मान लेते हैं, लेकिन गांधी जी का जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि एक साधारण, कमजोरियों और गलतियों से भरा इंसान भी अपने दृढ़ संकल्प और आत्म-सुधार से 'महात्मा' बन सकता है।
उनकी आत्मकथा के अनुसार इन घटनाओं का संदर्भ कुछ इस तरह है:
• मांस खाना: बचपन में वे बेहद डरपोक थे और उन्हें भूतों, चोरों और सांपों से बहुत डर लगता था। उनके एक शक्तिशाली मित्र ने उन्हें यह कहकर मांस खाने के लिए उकसाया कि अंग्रेज मांस खाते हैं इसलिए वे इतने मजबूत और निडर होते हैं। गांधी जी ने छिपकर मांस खाया, लेकिन माता-पिता से झूठ बोलने के अपराधबोध के कारण उन्होंने बाद में इसे हमेशा के लिए छोड़ दिया।
• बीड़ी के लिए चोरी: किशोरावस्था में बीड़ी पीने का चस्का पूरा करने और नौकर के पैसे चुराने की बात उन्होंने स्वीकार की है। हालांकि, इस गलती का पछतावा होने पर उन्होंने अपने पिता के सामने लिखित में अपना अपराध स्वीकार किया और माफी मांगी।
• वेश्यालय जाना: वे अपने दोस्तों के साथ एक वेश्यालय में भी गए थे, लेकिन वहां वे इतने संकोच और शर्म से भर गए कि बिना कुछ किए ही वापस लौट आए। गांधी जी इसे ईश्वर की कृपा मानते थे जिसने उन्हें बचा लिया।
• इंग्लैंड में 'जेंटलमैन' बनने की कोशिश: जब वे वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन गए, तो वहां के समाज में घुलने-मिलने के लिए उन्होंने महंगे अंग्रेजी कपड़े सिलवाए, फ्रेंच भाषा सीखने की कोशिश की, डांस क्लास जॉइन की और वॉयलिन बजाना सीखने लगे। हालांकि, जल्द ही उन्हें अपनी इस नासमझी का अहसास हुआ और उन्होंने इन सब बाहरी आडंबरों को छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान लगाया।
• शादी की बात छिपाना: इंग्लैंड में रहते हुए वे अपनी कम उम्र में हुई शादी की बात बताने में हिचकिचाते थे, क्योंकि वहां के समाज में इतनी कम उम्र में शादी होना आम नहीं था।
गांधी जी की सबसे बड़ी खूबी यह नहीं थी कि उनसे गलतियां नहीं हुईं, बल्कि यह थी कि उन्होंने अपनी हर गलती को खुले तौर पर स्वीकार किया, उससे सीख ली और खुद को बदला। यही वजह है कि उनकी जीवनी आज के युवाओं (Gen-Z) के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है।
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