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मध्यप्रदेश देश के “नेक्स्ट जेन टेक्नोलॉजी हब” के रूप में हो रहा स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश बनेगा देश की डिजिटल और तकनीकी अर्थव्यवस्था का प्रमुख ग्रोथ इंजन भावी तकनीकी नीतियों से विकास को मिल रही नई गति

  मध्यप्रदेश देश के “नेक्स्ट जेन टेक्नोलॉजी हब” के रूप में हो रहा स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Updated: 5/12/2026, 2:29:12 PM
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश उभरते आईटी राज्य से आगे बढ़ते हुए “नेक्स्ट जेन टेक्नोलॉजी हब” के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। मध्यप्रदेश निश्चित ही आने वाले समय में देश की डिजिटल और तकनीकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में कार्य करेगा।राज्य सरकार द्वारा जीसीसी, एआई, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, स्पेसटेक तथा एवीजीसी-एक्सआर जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में लागू की गई नीतियां प्रदेश को देश की नई तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित कर रही हैं। इन नीतियों से प्रदेश में वैश्विक निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार, नवाचार एवं कौशल विकास के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तकनीक, नवाचार और कौशल आधारित विकास मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

जीसीसी नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य 'मध्यप्रदेश'

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी-2025” लागू की है। इस नीति से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टेक्नोलॉजी, अनुसंधान, एनालिटिक्स और साझा सेवाओं के केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा पूंजीगत सब्सिडी, भूमि रियायत, किराया सहायता और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए वेतन अनुदान जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में विकसित हो रहा आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बना रहा है। इंदौर सुपर कॉरिडोर में विकसित हो रहे विश्वस्तरीय आईटी पार्क हजारों रोजगार अवसर सृजित करेंगे।

प्रदेश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में निरंतर बढ़ रहा आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। “मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025” के माध्यम से चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और डिजाइन आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। नीति में पूंजीगत निवेश सहायता, भूमि रियायत, स्टॉम्प शुल्क प्रतिपूर्ति और विद्युत शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के प्रावधान शामिल किये गये हैं। अनुसंधान आधारित कंपनियों और डिजाइन स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

भोपाल और ग्वालियर में पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना के लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव इस क्षेत्र में बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेश (वीएलएसआई) चिप डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम भी शुरू कर रही है जिससे भविष्य के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार हो सके।

स्पेस टेक्नोलॉजी में राष्ट्रीय पहचान की ओर अग्रसर प्रदेश

प्रदेश ‘स्पेसटेक नीति-2026’ जारी करने के साथ ही अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नई उड़ान भर रहा है। ‘स्पेसटेक नीति-2026’ का उद्देश्य प्रदेश को देश का अग्रणी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी केंद्र बनाना है। इस नीति के तहत उपग्रह निर्माण, भू-स्थानिक विश्लेषण, स्पेस स्टार्ट-अप्स और एडवांस्ड रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता, अनुसंधान अनुदान और स्टार्ट-अप समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है।

भोपाल में स्पेसटेक क्लस्टर विकसित करने के लिए केंद्र सरकारक उपक्रम ‘इन-स्पेस’ के साथ काम किया जा रहा है। आईआईटी इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, आरआरकैट और एमपीसीएसटी जैसे संस्थानों की भागीदारी से प्रदेश में स्पेस इनोवेशन इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है। स्मॉल-सैट डिजिटल ट्विन लैब और स्पेस इनोवेशन सैंड-बॉक्स जैसी पहलें मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिला रही हैं।

ड्रोन तकनीक से बढ़ रही प्रशासनिक दक्षता

“ड्रोन प्रमोशन एंड यूसेज पॉलिसी-2025” से प्रदेश में ड्रोन निर्माण और ड्रोन आधारित सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि, भू-अभिलेख, आपदा प्रबंधन, ट्रैफिक मॉनिटरिंग, खनन और वन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। साथ ही “मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना” से युवाओं को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

एवीजीसी-एक्सआर सेक्टर को मिल रहा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) सेक्टर को भी प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में एवीजीसी-एक्सआर लैब, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 20 एकड़ का मीडिया पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे डिजिटल कंटेंट और क्रिएटिव इकोनॉमी को नई गति मिलेगी। युवाओं को गेमिंग, एनिमेशन और डिजिटल मीडिया में रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

एआई आधारित गवर्नेंस को मिल रहा बढ़ावा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार एआई आधारित गवर्नेंस मॉडल पर भी तेजी से कार्य कर रही है। “रीजनल एआई इम्पैक्ट समिट-2026” के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं, नागरिक सेवाओं और डेटा विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे प्रशासन में पारदर्शिता, गति और कार्यकुशलता को नई मजबूती मिलेगी।

18 हजार करोड़ के तकनीकी प्रस्ताव प्रक्रियाधीन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार वैश्विक निवेशकों और तकनीकी कंपनियों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित कर रही है।मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) को इन तकनीकी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 35 से अधिक बड़े तकनीकी निवेश प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं, जिनकी अनुमानित लागत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश तकनीक, नवाचार और कौशल आधारित विकास मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जीसीसी, एआई, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, स्पेसटेक और एवीजीसी-एक्सआर जैसे क्षेत्रों में लागू की गई नीतियां प्रदेश को देश की नई तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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