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- स्वास्थ्य विभाग भोपाल सहित मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी है।
- जल्द ही मरीजों को उपचार के कागजी पर्चे संभालकर रखने या जांच रिपोर्ट खोने की चिंता नहीं रहेगी।
- डॉक्टर टेबलेट पर दवाएं लिखेंगे, पर्चा और जांच रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर पहुंचेगी और अस्पतालों का पूरा रिकॉर्ड ई-फाइल में सुरक्षित रहेगा।
- सरकार एक नवंबर से सभी सरकारी अस्पतालों को पेपरलेस बनाने की तैयारी कर रही है। इससे इलाज की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी।

स्वास्थ्य विभाग पहले 15 अगस्त से चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सफल परीक्षण के बाद इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना का खाका तैयार है और मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलते ही इस इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
मरीजों को 5 बड़े फायदे
पर्चा या रिपोर्ट खोने की परेशानी खत्म होगी।
इलाज का पूरा रिकॉर्ड ई-फाइल में सुरक्षित रहेगा।
मोबाइल पर मिलेगा डिजिटल पर्चा और जांच रिपोर्ट।
उपलब्ध दवाओं के आधार पर ही डॉक्टर दवा लिखेंगे।
आधारित स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। तेज, पारदर्शी और तकनीक
एआइ रखेगा हर अस्पताल पर नजर
स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों को एआइ से भी जोड़ेगा। इससे मुख्यालय को प्रदेशभर के अस्पतालों की दवा उपलब्धता, मरीजों की संख्या, उपचार, जांच और प्रशासनिक कार्यों की रियल टाइम निगरानी करने में मदद मिलेगी। अस्पतालों में खरीद, स्टॉक प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी ई-फाइल प्रणाली से संचालित होंगी।
मरीजों को होगा फायदा
नई व्यवस्था से मरीजों को अस्पताल के चक्कर कम लगाने पड़ेगे। पर्चा और जांच रिपोर्ट मोबाइल पर उपलब्ध होने से इलाज का रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेगा। भविष्य में किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर पुराने रिकॉर्ड भी आसानी से देख सकेंगे।
कैंसर को खत्म करेगा एम्स
स्वास्थ्य सेवाओं के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच भोपाल में विभिन्न रोगों के परंपरिक इलाज से दो कदम आगे एक ही रोग के प्रत्येक रोगी का अलग उपचार शुरू किया जाएगा। इसके तहत हर रोगी की शारीरिक स्थिति, उसके जीन (डीन), जीवनशैली, पर्यावरण और बीमारी के प्रकार के आधार उपाचर किया जाता है। इस आधुनिक चिकित्सा पद्धति को प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है। इसके तहत कैंसर, हृदय रोगों, डायबिटीज और मनोरोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है। एम्स भोपाल में एक वर्ष से ट्रॉयल चल रहा है। जीन आधारित जांच व उन्नत डायग्नॉस्टिक तकनीकों को धीरे-धीरे शामिल किया जा रहा है।
ऐसे होता है उपचार
मान लिया जाए कि दो मरीजों को कैंसर है, लेकिन दोनों के जीन अलग हैं। इसलिए एक ही दवा दोनों पर समान असर नहीं करती। प्रिसिजन मेडिसिन में जीनकी जांच के आधार पर हर मरीज के लिए अलग और सही दवा का चुनाव किया जाता है।
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