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- राहगीरों पर पत्थर फेंकती, कभी गले में तारों और छल्लों का गुच्छा लटकाए
- हाथों में गाड़ियों के नट-बोल्ट लिए भटकती इस महिला को लोग पागल समझते रहे,
- लेकिन उसके पीछे छिपी कहानी किसी भी संवेदनशील इंसान को भीतर तक झकझोर देने वाली है। बागसेवनिया थाना पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि महिला मूल रूप से रीवा की रहने वाली है।
- उसका पति शराब का कारोबार करता था। धीरे-धीरे उसने पत्नी को भी शराब की लत लगा दी। आए दिन होने वाले झगड़ों के बाद पति ने उसे घर से निकाल दिया।

हाथ पर लिखा था पति का नाम
पुलिस ने उसे संरक्षण में लिया, तब उसकी हालत बेहद दयनीय थी। उलझे हुए लंबे बाल, गले में एक दर्जन तार, मालाएं और लोहे के छल्ले, हाथों में गाड़ियों के नट-बोल्ट… मानो उसकी पूरी जिंदगी का दर्द उसके शरीर पर लटक रहा हो। हाथ पर पति का नाम लिखा था। इसके बाद शुरू हुआ उसकी जिंदगी को वापस पटरी पर लाने का प्रयास। पुलिस ने पहले बाल कटवाए, नहलवाया, नए कपड़े पहनवाए और इलाज शुरू कराया। धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य सुधरने लगा। इसी दौरान पुलिस ने उसके मायके वालों का पता लगाया और बेटी को खोज निकाला। ममता ने नई जिंदगी का रुख किया।
महिला ट्रक चालकों के झांसे में फंसी
बेघर और बेसहारा महिला मदद की तलाश में भटकती रही। रास्ते में एक ट्रक चालक ने सहारा देने का भरोसा दिया, लेकिन वही भरोसा उसके लिए नई त्रासदी बन गया। पुलिस जांच में सामने आया कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ। इसके बाद वह लंबे समय तक सड़कों पर भटकती रही। भूख, प्यास, असुरक्षा और लगातार नशे की गिरफ्त ने मानसिक संतुलन छीन लिया। हालात ऐसे हो गए कि वह राह चलते लोगों पर पत्थर फेंकने लगी और शहर में पागल महिला के नाम से पहचानी जाने लगी। पर अब जिंदगी पटरी पर लौट आई है।
बेटी को देख भावुक हो गई महिला
पुलिस ने बताया कि जैसे ही महिला ने बेटी को देखा, उसकी बुझी आंखों में पहचान की चमक लौट आई। वह भावुक हो गई और उसकी यादें लौटने लगीं। पुलिस ने उसके पति को भी तलाश कर उससे पत्नी के इलाज और भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने को कहा है। मायका पक्ष भी अब उसके साथ खड़ा है। यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उस सच्चाई की है जो बताती है कि सड़कों पर दिखने वाला हर पागल इंसान मानसिक बीमारी से पहले किसी न किसी दर्दनाक सफर का शिकार होता है।
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