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- पिछले 24 घंटों में छतरपुर के गौरीहार में 182 मिमी अति भारी वर्षा सहित विंध्य और बुंदेलखंड के अनेक जिलों में हुई अच्छी वर्षा ने यह संकेत दिया है कि मानसून का मुख्य प्रभाव फिलहाल पूर्वी मध्य प्रदेश पर केंद्रित है
- बंगाल की खाड़ी पर 13 जुलाई के आसपास एक नई मौसम प्रणाली बनने की संभावना है। जिसका असर मध्यप्रदेश पर पड़ेगा।है।

मौसम वैज्ञानिक नायक के मुताबिक 13 जुलाई के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (Upper Air Cyclonic Circulation) बनने की संभावना है। यदि समुद्र और वायुमंडल की परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो यही प्रणाली आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र (Low Pressure Area) का रूप ले सकती है।
तीन दिन कम होगी बारिश
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के उत्तर-मध्य क्षेत्र पर निम्न दाब का क्षेत्र कमजोर पड़ सकता है। इसके कारण अगले दो-तीन दिनों में मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की तीव्रता कम रहेगी। मानसून द्रोणिका भी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर बनी रहने की संभावना है, जिससे बारिश में कमी देखने में आ सकती है। फिर भी यह स्थिति 'ब्रेक मानसून' जैसी नहीं मानी जा सकती है। क्योंकि बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम मानसून को दोबारा एक्टिव करने में अहम रोल अदा कर सकता है।
इन जिलों में पड़ेगा प्रभाव
बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने का सबसे अधिक असर पूर्वी मध्यप्रदेश पर पड़ सकता है। इस क्षेत्र के रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, पन्ना, छतरपुर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, कटनी, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट तथा जबलपुर जिलों में वर्षा की गतिविधियाँ पुनः तेज़ होने की संभावना रहेगी। जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में जहां हाल ही में सामान्य से काफी अधिक बारिश हो गई है, वहां बारिश की तीव्रता कम हो सकती है।
फसलों के लिए लाभदायक समय
शैलेंद्र नायक कहते हैं कि खरीफ फसलों की दृष्टि से जुलाई का दूसरा पखवाड़ा अत्यंत अहम रहने वाला है। नया निम्न दाब का क्षेत्र बनने का असर मध्य भारत पर हो सकता है। इससे सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द तथा अन्य खरीफ फसलों के लिए यह अत्यंत लाभकारी साबित होगा। इसके साथ ही डैम, तालाबों, नदियों और भूजल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि कुछ क्षेत्र में अत्यधिक बारिश, जल भराव, नदी-नाले उफान पर और आकाशीय बिजली गिरने जैसी स्थिति भी बनेंगी। इसके लिए मौसम विभाग के बुलेटिन का अवलोकन जरूर कर लेना चाहिए।
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