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चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। RTI के जवाब में आयोग ने इसे ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा से जुड़ा मामला बताया। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं किया कि वोटर लिस्ट की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।
RTI में सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार किया। हालांकि, आयोग ने कहा कि SIR के लिए न तो कोई नया सॉफ्टवेयर बनाया गया और न ही खरीदा गया।
यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि सॉफ्टवेयर मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों को अपने आप पहचानता है या केवल अधिकारियों को जांच में सहायता देता है।
क्या SIR में AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हुआ?
RTI में पूछा गया था कि मतदाता सूची की जांच के लिए AI, मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग किया गया था या नहीं। आयोग ने इस सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
सॉफ्टवेयर से अपने आप मतदाताओं के नाम हटाए जाने की भूमिका पर भी आयोग ने अलग से जानकारी नहीं दी। उसने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय संबंधित क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर लेते हैं।
वोटर लिस्ट में बदलाव की जिम्मेदारी ERO की
आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B(1) और 13B(2) का उल्लेख करते हुए बताया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के ERO की जिम्मेदारी मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने की होती है।
सॉफ्टवेयर द्वारा चिह्नित रिकॉर्ड की समीक्षा और मंजूरी से जुड़े सवालों पर आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। हालांकि, इन जवाबों से सॉफ्टवेयर की वास्तविक भूमिका और तकनीकी प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई।
दो चुनाव आयुक्तों ने अधिकारी के कामकाज पर उठाए सवाल
RTI एक्टिविस्ट लोकेश के. बत्रा को मिले दस्तावेजों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। इन पत्रों में डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग के कामकाज और अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियां बांटने से जुड़े एक आदेश पर सवाल उठाए गए थे।
दोनों आयुक्तों ने कथित तौर पर आपत्ति जताई थी कि संबंधित आदेश चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना जारी किया गया। दस्तावेजों के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय ने कहा कि ये पत्र पूरे चुनाव आयोग की ओर से भेजी गई आधिकारिक शिकायतें नहीं थे। इसलिए मामले को कार्रवाई के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा गया।
SIR सॉफ्टवेयर पर पारदर्शिता को लेकर सवाल

SIR के दौरान इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की तकनीकी जानकारी, AI के संभावित उपयोग और चिह्नित रिकॉर्ड की समीक्षा की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। वहीं, आयोग के जवाब के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का अंतिम निर्णय संबंधित ERO की जिम्मेदारी है।
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