This report has been reviewed.
शॉर्ट समरी: दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बाधित करने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। गृह सचिव गोविंद मोहन ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था। वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने स्पष्ट किया कि पूरी मेट्रो सेवा बंद नहीं हुई थी, बल्कि 303 में से 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सीमित किया गया था। मामले में आज 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
दिल्ली इंटरनेट बंदी मामले में केंद्र ने क्यों मांगी माफी?

दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित की गई थीं। यह प्रतिबंध रायसीना हिल्स के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में लगाया गया था।
केंद्र सरकार की ओर से गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी। सरकार का कहना है कि इंटरनेट बंद करने का फैसला सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। केंद्र ने यह भी कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का इरादा नहीं था।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से पहले ही मेट्रो और रेल सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदर्शन के दिन लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर अदालत में याचिकाएं दाखिल हुईं।
DMRC ने कहा- पूरी मेट्रो सेवा बंद नहीं हुई थी
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था। दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था।
DMRC के मुताबिक, पुलिस के निर्देशों के आधार पर प्रभावित स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए गए थे, जबकि ट्रेन सेवाएं जारी रहीं। मेट्रो प्रशासन ने अदालत के सामने बिना शर्त माफी भी पेश की।
हालांकि, स्टेशनों पर पाबंदियों के कारण यात्रियों को परेशानी हुई और मेट्रो की सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई। सुप्रीम कोर्ट में इसी बात पर सवाल उठे कि क्या सार्वजनिक परिवहन पर इस तरह की पाबंदियां लगाना जरूरी और उचित था।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा था जवाब
प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को विशेष सुनवाई की थी। अदालत ने अधिकारियों से मेट्रो सेवाओं, इंटरनेट और लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर जवाब मांगा था।
अदालत ने कहा था कि कानून के दायरे में रहते हुए लोगों की आवाजाही सामान्य रहनी चाहिए, मेट्रो और ट्रेन सेवाएं चलती रहनी चाहिए और इंटरनेट सेवाओं को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों के बावजूद 10 अक्टूबर को कई जगहों पर आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाए।
दिल्ली पुलिस ने CJP पर लगाए हिंसा और नुकसान के आरोप
दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला दिया। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से दाखिल जवाब में CJP के प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों को घायल करने के आरोप लगाए गए।
पुलिस ने CJP के 20 जुलाई को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में निकाले गए मार्च को भी अवैध जमावड़ा बताया। ये पुलिस के हलफनामे में लगाए गए आरोप हैं; इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों की ओर से दाखिल याचिकाओं में हिरासत और आवाजाही पर प्रतिबंधों की वैधता को चुनौती दी गई है। इस मामले में अदालत को सरकार, पुलिस और मेट्रो प्रशासन के पक्षों पर विचार करना है।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?

CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और राजधानी के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
CJP के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने पर विमान से ही हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं। बाद में मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया था।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें आईं। कुछ रिपोर्टों और याचिकाओं में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 7,000 बताई गई है। हालांकि, हिरासत के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। पुलिस ने कुछ स्थानों पर पथराव और जवानों के घायल होने की बात भी कही।
आज की सुनवाई में किन मुद्दों पर नजर रहेगी?
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से इन सवालों पर ध्यान रहेगा:
- इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के फैसले को लेकर केंद्र का पक्ष।
- 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने के औचित्य पर DMRC और पुलिस का जवाब।
- अदालत के पहले के निर्देशों के कथित उल्लंघन का मामला।
- प्रदर्शनकारियों की हिरासत और लोगों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों की वैधता।
NewsSukhDukh की नजर इस मामले पर बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट का रुख यह तय करने में अहम होगा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन सार्वजनिक परिवहन, इंटरनेट और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर किस सीमा तक प्रतिबंध लगा सकता है।
- Source




