This report has been reviewed.
NTA और CBSE से संसदीय समिति के तीखे सवाल, जांच के घेरे में OSM और पेपर लीक विवाद
NEET पेपर लीक मामले और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद अब संसद की स्थायी समिति तक पहुंच गए हैं। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और CBSE से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं।
समिति ने दोनों संस्थानों को विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए कहा है। जांच का फोकस एक तरफ NEET पेपर लीक विवाद पर है, तो दूसरी तरफ CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और उससे जुड़े टेंडर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
NTA से पूछा- पेपर लीक की परिभाषा क्या है?

समिति ने NTA से सीधा सवाल किया है कि उसकी नजर में "पेपर लीक" की परिभाषा क्या है।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में NTA अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ था, बल्कि केवल एक "गेस पेपर" सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था।
समिति ने यह भी पूछा है कि 2018 से अब तक NTA द्वारा आयोजित किसी परीक्षा में क्या कभी वास्तविक पेपर लीक की घटना सामने आई है।
NTA से मांगी गई मैनपावर की पूरी जानकारी
संसदीय समिति ने केवल पेपर लीक तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है।
समिति ने NTA के संगठनात्मक ढांचे, कर्मचारियों की संख्या और पिछले तीन वर्षों में की गई नियुक्तियों का पूरा विवरण भी मांगा है। अधिकारियों से यह जानकारी साझा करने को कहा गया है कि 2022 से अब तक एजेंसी में कितने नए कर्मचारी नियुक्त किए गए और वर्तमान में कुल कितने लोग विभिन्न परीक्षाओं के संचालन में कार्यरत हैं।
Coempt कंपनी को लेकर CBSE से सवाल

CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर भी समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
समिति ने पूछा है कि क्या Coempt कंपनी को ठेका देने से पहले उसके बैकग्राउंड की पूरी जांच की गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या बोर्ड को इस बात की जानकारी थी कि कंपनी के निदेशक पहले Globarena Technologies से जुड़े रहे हैं।
Globarena विवाद क्यों बना मुद्दा?
विवाद की जड़ 2019 के तेलंगाना बोर्ड परीक्षा परिणामों से जुड़ी है।
उस समय लाखों छात्रों के रिजल्ट में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं और जांच में Globarena Technologies के सॉफ्टवेयर पर सवाल उठे थे। बाद में कंपनी का नाम बदलकर Coempt कर दिया गया।
अब आरोप लगाया जा रहा है कि CBSE ने कंपनी के पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज करते हुए उसे OSM सिस्टम का ठेका दिया।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
समिति ने CBSE से यह भी पूछा है कि OSM के तीसरे टेंडर में उन कंपनियों को अयोग्य घोषित करने वाली शर्त क्यों हटा दी गई, जिनका पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है।
इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति जानना चाहती है कि आधुनिक रोबोटिक स्कैनर की जगह सामान्य स्कैनर के उपयोग की अनुमति क्यों दी गई।
राहुल गांधी भी उठा चुके हैं मुद्दा

इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया था जब 27 मई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से Coempt कंपनी को लेकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने दावा किया था कि CBSE ने जिस कंपनी को डिजिटल मूल्यांकन का ठेका दिया है, उसका पहले नाम Globarena था। राहुल गांधी ने यह भी पूछा था कि कंपनी को यह ठेका किन परिस्थितियों में और किस आधार पर दिया गया।
अब आगे क्या होगा?
संसदीय समिति द्वारा मांगे गए जवाबों के बाद अब NTA और CBSE को अपना पक्ष रखना होगा।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समिति को जवाब संतोषजनक नहीं लगे तो मामले में आगे और विस्तृत जांच या अतिरिक्त सुनवाई भी हो सकती है।
- Source





