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पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टरों ने आज प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रखी है। इंदौर, रतलाम सहित अन्य शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टर काम नहीं कर रहे हैं। इससे मरीजों को मिलने वाली नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गई हैं। उधर, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर बैठक हुई। शुक्ल ने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधि पर बैठक में थे। सकारात्मक चर्चा हुई है। वे सीएम के आने पर फिर से बैठक करने को लेकर राजी हैं।
भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर से कमला पार्क की सड़क पर बैठे हैं। उन्होंने सड़क जाम कर विरोध जताया है। डॉक्टरों का कहना है कि मांगों को लेकर आधिकारिक बातचीत होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इधर, पुलिस ने सीएम हाउस की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर चौकसी बढ़ा दी है। अस्पताल परिसर और आसपास भी पुलिस बल तैनात है।
हमीदिया अस्पताल में प्रदर्शन के कारण ओपीडी पूरी तरह बंद है और ओटी का भी बहिष्कार किया जा रहा है। इलाज और जांच के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी हो रही है। अस्पताल के तीन गेटों में से फिलहाल सिर्फ गेट नंबर-2 खुला है। इमरजेंसी गेट बंद होने से इमरजेंसी मरीजों को भी इसी गेट से प्रवेश करना पड़ रहा है। इससे अस्पताल के बाहर ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है।
इंटर्न डॉक्टरों के साथ प्रदर्शन के दौरान हुए वॉटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में जांच के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। सोमवार को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था। घटना के बाद डॉक्टरों ने कार्रवाई का विरोध किया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी। मामले को लेकर सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत भी जारी है। अब पुलिस आयुक्त के निर्देश पर वॉटर कैनन के इस्तेमाल की परिस्थितियों और कार्रवाई की जांच की जाएगी।
इंदौर के एमवाय अस्पताल परिसर में इंटर्न डॉक्टरों ने विरोध स्वरूप रैली निकाली। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में डॉक्टरों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। रैली में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर शामिल हुए। डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। उनका कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बावजूद भोपाल में वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। इसी के विरोध में एमवाय अस्पताल परिसर में रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया गया।
एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के बीच मंगलवार को डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने वरिष्ठ चिकित्सकों और अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर चर्चा की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों की दोनों प्रमुख मांगों—स्टाइपेंड बढ़ाने और सोमवार को प्रदर्शन के दौरान वॉटर कैनन व लाठीचार्ज की कार्रवाई—पर गंभीरता से चर्चा हुई है। उन्होंने दावा किया कि दोनों मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई है और इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों ने भी इससे संतोष व्यक्त किया है।
राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री से भी लगातार संपर्क में रहकर इस मामले पर बातचीत की जा रही है। बातचीत को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधि बैठक में पहुंचे थे और आवश्यकता पड़ने पर उनसे दोबारा बातचीत की जाएगी।
इंटर्न डॉक्टरों के सड़क से हटने और यातायात व्यवस्था बहाल होने के सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि इसी दिशा में सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के वापस आने के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर बातचीत होगी और इस बात पर भी सहमति बनी है।
इधर, इंटर्न डॉक्टरों की ओर से कहा गया है कि वे स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। उनका यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया गया है, इसलिए मध्यप्रदेश में भी सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए। फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है।
इंटर्न डॉक्टर रिंकू वर्मा ने बताया कि हमारी प्रमुख मांग स्टाइपेंड बढ़ाने की है। वर्तमान में हमें 14,337 रुपए स्टाइपेंड मिलता है, जो पूरे देश में सबसे कम है। दूसरे राज्यों की तुलना में वहां फीस कम होने के बावजूद इंटर्न डॉक्टरों को अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इसलिए हमारी स्पष्ट मांग है कि स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए।
उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी चिंता भोपाल के जीएमसी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के साथ हुए व्यवहार को लेकर है। वहां लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इस कार्रवाई में कई इंटर्न डॉक्टर घायल हुए हैं। किसी के ईयरड्रम में चोट आई है तो किसी को फ्रैक्चर हुआ है।
उन्होंने कहा कि हम दिन-रात अस्पताल में ड्यूटी करते हैं और मरीजों की जान बचाने के लिए पूरी मेहनत करते हैं। ऐसे में अपने हक की आवाज उठाने पर हमारे साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी मेहनत के अनुरूप उचित स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि इंटर्न डॉक्टरों की जायज मांग को गंभीरता से लिया जाए और स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिद्धू ने बताया कि हमारे इंटर्न बैच के साथी पिछले काफी समय से सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सभी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बावजूद जिस तरह वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया, वह बेहद गलत और दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे सभी लोग डॉक्टर थे, न कि कोई असामाजिक तत्व या आतंकवादी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। हम सभी डॉक्टर इस कार्रवाई का विरोध करते हैं।
उन्होंने बताया कि इसी विरोध में आज इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने सुबह 9 से 11 बजे तक ओपीडी में सेवाएं दीं। इसके बाद ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गईं।
उन्होंने कहा कि हमारी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली, इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाए और दूसरी, लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए। मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो हड़ताल आगे भी जारी रहेगी।
इंदौर के एमवाय अस्पताल की ओपीडी में सुबह 11 बजे तक जूनियर डॉक्टर मौजूद थे। इसके बाद वे ओपीडी से चले गए। जूनियर डॉक्टरों के नहीं रहने से ओपीडी की व्यवस्था प्रभावित हुई है। फिलहाल सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे ओपीडी पर दबाव बना हुआ है।
जूनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण सीनियर डॉक्टरों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था बनाए रखने में जुटा है। मरीजों की भीड़ के बीच सीनियर डॉक्टर लगातार ओपीडी में सेवाएं दे रहे हैं।
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों के साथ पुलिस द्वारा की गई मारपीट के विरोध में इंदौर में भी प्रदर्शन शुरू हो गया है। एमवाय अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों ने एकजुट होकर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया। डॉक्टरों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के साथ मारपीट करना गलत है। भोपाल की घटना के विरोध में इंदौर के इंटर्न डॉक्टरों ने काम छोड़कर प्रदर्शन शुरू किया है। उनका कहना है कि जब तक मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती और उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत नहीं की जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन के चलते अस्पताल में सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों के साथ पुलिस द्वारा की गई मारपीट के विरोध में इंदौर में भी प्रदर्शन शुरू हो गया है। एमवाय अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों ने एकजुट होकर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया। डॉक्टरों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के साथ मारपीट करना गलत है। भोपाल की घटना के विरोध में इंदौर के इंटर्न डॉक्टरों ने काम छोड़कर प्रदर्शन शुरू किया है। उनका कहना है कि जब तक मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती और उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत नहीं की जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन के चलते अस्पताल में सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
कमला पार्क पर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने नारेबाजी शुरू कर दी है। वे पुलिस को आगे करने से नाराज हैं और स्वास्थ्य मंत्री के धरना स्थल पर आकर बात करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, प्रदर्शन जारी रहेगा और समय के साथ तीव्र होता जाएगा।
यह मसीहुल्लाह सिद्दीकी हैं, जो जवाहरलाल नेहरू कॉलेज में पढ़ाते हैं। कॉलेज सीएम हाउस के नजदीक है और वहां जाने वाले सभी रास्ते बंद किए जाने के कारण वे अपने कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इलाके में रहने वाले सैकड़ों लोगों को भी किस तरह की परेशानी हो रही होगी। रास्तों को इस तरह से बंद किया गया है कि पैदल चलने वाले लोग भी वहां से नहीं निकल पा रहे हैं।
इसके अलावा, कमला पार्क का मुख्य गेट भी बंद कर दिया गया है। पार्क का रास्ता बोर्ड क्लब के पास, यानी सीएम हाउस की दीवार के नजदीक खुलता है। इसी वजह से पुलिस ने इस रास्ते को भी ब्लॉक कर दिया है। ऐसे में इलाके में रहने वाले सैकड़ों लोगों के लिए घर से बाहर निकलना और वापस लौटना मुश्किल हो गया है।
सड़क पर अब जाम लगने लगा है। रोशनपुरा से लेकर रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति नजर आ रही है। हालांकि, पुलिस ने ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए कई डायवर्जन किए हैं। वाहनों को जहांगीराबाद वाले रूट से भेजा जा रहा है। वहीं, राजा भोज ब्रिज पर एक ही रूट से दोनों तरफ का ट्रैफिक गुजारा जा रहा है। इस सड़क पर प्रतिदिन करीब 5 हजार वाहनों का ट्रैफिक रहता है, जबकि पीक ऑवर में यह संख्या 8 से 10 हजार तक पहुंच जाती है।
डीसीपी गुप्ता ने बताया कल रात से ही यहां पुलिस फोर्स तैनात है। सड़क के एक तरफ से ट्रैफिक चल रहा है। यह अभी थोड़ा धीमा हुआ है। इंटर्न डॉक्टरों से लगातार संवाद कर रहे हैं।
डीसीपी गुप्ता ने कहा कि पहले बात पूर्वी गेट की तरफ जाने की हुई थी, लेकिन इमरजेंसी गेट पर धक्का-मुक्की करने लगे। इसके चलते वाटर कैनन की जरूरत पड़ी।
इंटर्न डॉक्टर दो दिन से भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं। कमला पार्क के पास वे बीच सड़क पर बैठे हैं। सोमवार को आंदोलन उग्र हो गया था। डॉक्टर हमीदिया अस्पताल से बाहर निकलकर सड़क पर बैठ गए थे।
इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का उपयोग किया। इंटर्न डॉक्टरों ने पुलिस पर लाठी चलाने के आरोप लगाए। इससे कई डॉक्टर घायल भी हो गए। इस मामले में डीसीपी जोन-3 आयुष गुप्ता से भास्कर ने पूछा कि वाटर कैनन चलाने या लाठी भांजने की जरूरत क्यों पड़ी?
गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता सिंह ने कहा, “वाटर कैनन का इस्तेमाल करके गलत किया गया। मुझे भी यह अच्छा नहीं लगा। मैं बच्चों को लेने आई थी, ताकि उन्हें डिप्टी सीएम के यहां होने वाली मीटिंग में लेकर जा सकूं। हालांकि, बच्चों ने जाने से मना कर दिया। उनका कहना है कि डिप्टी सीएम खुद यहां आएं और हमसे बात करें।”
इंटर्न डॉक्टरों ने फिर से हड़ताल शुरू कर सड़क जाम कर दिया है। ट्रेनी डॉक्टरों का कहना है कि करीब तीन घंटे पहले ही हमने पुलिस को बता दिया था कि हम सड़क बंद करने वाले हैं। पुलिस से पहले ही जाम और डायवर्जन की व्यवस्था देखने के लिए कह दिया गया था, क्योंकि अभी तक किसी ने हमारी मांगों को लेकर आधिकारिक तौर पर बात नहीं की है। जब तक हमारी मांगों पर बातचीत नहीं होगी, तब तक हम इसी सड़क पर बैठे रहेंगे।
बता दें कि कमला पार्क की यह मुख्य सड़क शहर के केंद्र में है। इसके जाम होने से कमला पार्क के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में यातायात प्रभावित होता है। फिलहाल सुबह से इसका असर कोहेफिजा सड़क तक पहुंच गया है। जल्द ही लालघाटी, जहांगीराबाद, जिंसी और बागड़ा पुल पर भी जाम की स्थिति बन सकती है।
इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को खुद आकर आंदोलन कर रहे बच्चों से मिलना चाहिए और उनकी मांग सुननी चाहिए। पटवारी ने सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्ते पर लगाए गए बैरिकेड्स को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सीएम हाउस के रास्ते पर बैरिकेडिंग कर भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर बना दी गई है। पटवारी ने कहा कि सरकार को डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
हमीदिया अस्पताल के बाहर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। डॉक्टर सड़क पर बैठकर विरोध जता रहे हैं और सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के चलते अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। ओपीडी और ओटी का बहिष्कार किया जा रहा है, जबकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गई हैं। इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को देखते हुए अस्पताल परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात है। डॉक्टरों का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में डेढ़ हजार से अधिक मरीज हैं। किसी को किडनी की समस्या है तो किसी को तेज दर्द हो रहा है, लेकिन पर्चे बनना बंद हो गए हैं। मरीज तीन-चार घंटे से कतार में खड़े थे। जूनियर डॉक्टर सुरेंद्र ने आकर पर्चे बनाने की व्यवस्था बंद कर दी। जिन मरीजों के पर्चे बन चुके थे, उन्हें सिर्फ जीएमसी के प्रोफेसर देख रहे हैं। इसके चलते ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।
हमीदिया अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन के चलते ओपीडी पूरी तरह बंद हो गई है। इलाज और जांच के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ बढ़ गई है। ओपीडी में डॉक्टरों के नहीं मिलने से कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है, जबकि कुछ मरीज इंतजार कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों पर ओपीडी की व्यवस्था काफी हद तक निर्भर रहती है। उनके प्रदर्शन के कारण मरीजों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं चालू हैं, लेकिन ओपीडी बंद होने से सामान्य मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मेडिकल टीचर्स डॉक्टर्स एसोसिएशन, जूडा और इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन के चलते हमीदिया अस्पताल परिसर में फिलहाल सिर्फ जीएमसी के प्रोफेसर ही मरीजों को देख रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों पर ओपीडी काफी हद तक निर्भर रहती है, इसलिए उनके नहीं होने से मरीजों की लंबी कतारें लग गई हैं और परेशानी बढ़ गई है।
अस्पताल के तीन गेटों में से फिलहाल सिर्फ गेट नंबर-2 खुला है। ऐसे में मरीज और उनके परिजन इसी गेट से आ-जा रहे हैं। गेट नंबर-1 और इमरजेंसी गेट बंद होने से इमरजेंसी के मरीजों को भी गेट नंबर-2 से ही प्रवेश करना पड़ रहा है। इसके चलते रॉयल मार्केट वाली सड़क पर ट्रैफिक का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
इंटर्न डॉक्टर अभी भी कमला पार्क की सड़क पर लेटे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्ते को पुलिस ने पूरी तरह बंद कर दिया है।
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