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5 लोग गंभीर घायल हैं, जिन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है। रेस्क्यू डॉग और कैमरे के सहायता से लोगों की तलाश की जा रही है।
हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। गिरी हुई इमारत करीब 40 साल पुरानी थी। दिल्ली नगर निगम (MCD) के रिकॉर्ड में इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत के बेसमेंट में पिछले 7 दिनों से तोड़फोड़ का काम चल रहा था। बेसमेंट पहले से कमजोर था और उसमें पानी भी भरा हुआ था। खुदाई के दौरान एक पिलर खिसक गया, जिससे पूरी इमारत ढह गई। हादसे के समय वहां काम कर रहे मजदूर भी मलबे में दब गए।
इमारत के पास बनी एक दूसरी बिल्डिंग को भी खाली करा लिया गया है। उसमें दरारें दिखाई दी हैं। रेस्क्यू टीम के मुताबिक, मलबा हटाने के दौरान इस बिल्डिंग के भी गिरने का खतरा है। इसे सुरक्षित रखने के लिए सपोर्ट देने वाले पिलर लगाए जा रहे हैं।
हादसे के बाद हुए एक्शन…
बिल्डिंग के मालिक का नाम हरिराम बंसल है, जो गुरुग्राम में रहता है। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या और लापरवाही की धाराओं FIR दर्ज कर ली है।
दिल्ली मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि 4 मंजिल से ज्यादा वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में पीजी गिरने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
6 सितंबर के MCD के एक ऑर्डर में सत्य निकेतन में बनी सभी जर्जर और खतरनाक इमारतों को गिराने का नोटिस लगा दिया गया है।
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास बसा प्रमुख छात्र इलाका है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके में कई हॉस्टल हैं। इनके आसपास ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट, मोतीलाल नेहरू और मैत्रेयी कॉलेज हैं।
इसी वजह से यहां दिनभर छात्रों की आवाजाही रहती है। हालांकि, सत्य निकेतन में कुल कितने छात्र रहते हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 1133 घटनाएं
2022 से 2025 तक यानी 3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने के 1133 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में 98 लोगों की मौत हुई है।
रिसर्च के मुताबिक, मलबे में फंसे लोगों को बचाने में हर घंटा बेहद अहम होता है। USAR के आंकड़ों के अनुसार, 30 मिनट के भीतर फंसे लोगों के जीवित बचने की दर करीब 91% होती है, जो 24 घंटे में 81%, 48 घंटे में 36.7% और 5 दिन में करीब 7.4% रह जाती है। हालांकि, ये औसत आंकड़े हैं और वास्तविक स्थिति चोट, मलबे में हवा और पानी की उपलब्धता समेत कई चीजों पर निर्भर करती है।
मेयर प्रवेश वाही ने बताया कि हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हुई है। 6 अन्य लोगों का इलाज जारी है, जबकि 2 घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। एम्स में भर्ती मरीजों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
मेयर ने कहा कि शुरुआती तौर पर यह हादसा लगता है। उनके मुताबिक, यह मकान पुराना था और निर्माण के दौरान किसी तरह की लापरवाही या स्ट्रक्चरल फेलियर के कारण पूरी इमारत गिर गई।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता संरचना का भार संभालने के लिए पर्याप्त नहीं होने की आशंका है। मेयर ने बताया कि बिना मंजूर नक्शे के मकान बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली फायर अधिकारी अभिलाष कुमार मलिक ने बताया कि दमकल विभाग को रविवार दोपहर 1:33 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली थी। इसके एक मिनट बाद शुरुआती टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि दमकल की पहली टीम के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद अधिकारियों को मौके की स्थिति की जानकारी दी गई। इसके बाद बचाव अभियान तेज किया गया। हादसे में कई लोग मलबे में फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए दमकल, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने मिलकर अभियान चलाया।
दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को लेकर सिविक सेंटर स्थित MCD ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। प्रदर्शनकारी MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
बिल्डिंग का मुख्य मालिक हरि राम बंसल है, जिसका भाई आनंद बंसल है। हरि बंसल के दो बेटे हैं ,जिसमें से एक पायलट है जबकि दूसरा गुड़गांव सेक्टर 23 में पेंट की दुकान चलाता है।
सत्य निकेतन का मलबा, पास की कम्युनिटी बिल्डिंग के कैंपस में डंप किया जा रहा है। घायलों के दोस्त और परिजन मलबे से सामान पहचानकर पुलिस को बता रहे हैं। इसी मलबे में खून से सने कपड़े, बर्तन बैग भी मौजूद हैं।
भास्कर रिपोर्टर उदय बता रहे हैं कि बेसमेंट में अब भी मजदूर और स्टूडेंट्स के फंसे होने की आशंका है, लेकिन उनके जिंदा होने की उम्मीद न के बराबर है।
रेस्क्यू टीमों के मुताबिक अब तक 6 शव निकाले जा चुके हैं। 12 का रेस्क्यू किया गया है। 5 को गंभीर चोटें आई हैं। इनका इलाज एम्स में चल रहा है।
हादसे के बाद मलबे में दबे एक युवक ने अपना वीडियो बनाकर शेयर किया। उसने लोगों से रेस्क्यू की अपील की। घटनास्थल पर मौजूद एक युवक ने भास्कर रिपोर्टर को बताया कि यह युवक उसका दोस्त है। वह बार-बार फोन करके कह रहा है- मुझे बचा लो।
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