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MP Weather Update: सितंबर के पहले सप्ताह में बदला बारिश का आंकड़ा
मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां सितंबर के पहले सप्ताह में भी बनी हुई हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान तेज बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने, वहीं इसके बाद पश्चिमी, मध्य और उत्तरी हिस्सों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई।
इस बारिश का असर पूरे प्रदेश के सीजनल आंकड़ों पर देखने को मिला है। अब तक मध्य प्रदेश में 778.9 मिमी यानी करीब 30.7 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। सामान्य आंकड़ा 823.9 मिमी यानी 32.4 इंच है। इस हिसाब से प्रदेश में सामान्य बारिश का लगभग 95 प्रतिशत पानी गिर चुका है और करीब 1.7 इंच की कमी बाकी है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहा तो यह अंतर और कम हो सकता है।
भोपाल समेत 12 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

प्रदेश के कई जिलों में मानसून सामान्य से ज्यादा सक्रिय रहा है। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और शहडोल में सामान्य से 101 से 146 प्रतिशत तक बारिश दर्ज की गई है।
इन जिलों में बारिश का सीजनल कोटा पूरा हो चुका है। कुछ जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी गिरा है, जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में अभी भी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हुआ है।
इसके अलावा बुरहानपुर, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, अनूपपुर और उमरिया में भी 90 प्रतिशत से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मऊगंज में सबसे ज्यादा 53 इंच बारिश
इस मानसून सीजन में मऊगंज प्रदेश का सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला बना हुआ है। यहां अब तक करीब 53 इंच पानी गिर चुका है।
इसके बाद मंडला, पन्ना, निवाड़ी, मैहर, सीधी, सतना, शहडोल और उमरिया जैसे जिलों में भी 40 से 50 इंच के बीच बारिश दर्ज की गई है।
वहीं प्रदेश के पश्चिमी हिस्से के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी औसत से काफी नीचे है। खासकर आलीराजपुर, धार, झाबुआ, बड़वानी, रतलाम और मुरैना जैसे जिलों में मानसून का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से कमजोर रहा है।
भोपाल के भदभदा और कलियासोत डैम ओवरफ्लो

लगातार बारिश के कारण भोपाल और आसपास के इलाकों में जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। भदभदा और कलियासोत डैम में पानी का स्तर काफी बढ़ गया है और ओवरफ्लो की स्थिति बनी है।
इसके अलावा बरगी, बाणसागर, गोपीकृष्ण समेत कई बड़े जलाशयों में भी पर्याप्त पानी पहुंच चुका है। इंदिरा सागर, गांधी सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, ओंकारेश्वर, जौहिला और कुंडालिया जैसे जलाशयों में भी जलभराव का स्तर काफी अधिक बताया गया है।
तेज बारिश का असर नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है।
इस बार 9 दिन की देरी से पहुंचा था मानसून
मध्य प्रदेश में इस बार मानसून ने सामान्य समय की तुलना में करीब 9 दिन की देरी से दस्तक दी थी। मानसून 24 जून को प्रदेश में पहुंचा और इसके बाद करीब नौ दिनों में पूरे राज्य में फैल गया।
मानसून की शुरुआती देरी का असर जून की बारिश पर पड़ा था। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई थी। हालांकि जुलाई में मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद स्थिति तेजी से सुधरी।
जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया था। इसके बाद दूसरे सप्ताह में मानसून कुछ कमजोर रहा, लेकिन तीसरे और चौथे सप्ताह में अच्छी बारिश ने कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया।
अगस्त के दूसरे सप्ताह से प्रदेश में भारी बारिश का दौर दोबारा शुरू हुआ और सितंबर के पहले सप्ताह तक कई जिलों में इसका असर देखने को मिला।
पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति बेहतर
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के पूर्वी हिस्से में हाल के दिनों में अच्छी बारिश हुई है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के कई जिलों में पहले बारिश की कमी थी, लेकिन पिछले सप्ताह में हुई तेज बारिश से आंकड़ों में सुधार आया है।
बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर पिछले दिनों बाढ़ जैसे हालात भी बने।
लगातार बारिश के कारण पूर्वी हिस्से का सीजनल आंकड़ा भी बेहतर हुआ है और बारिश की कमी काफी कम हुई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में कई जिलों में बारिश कम

दूसरी तरफ पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य की तुलना में बारिश कम रही है।
इन इलाकों में कुछ जिलों में कमी काफी ज्यादा है। खासतौर पर पश्चिमी हिस्से में मानसून की सक्रियता बढ़ने की जरूरत बनी हुई है।
इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के कई जिलों में इस सीजन सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
इन जिलों में मानसून की स्थिति प्रदेश के औसत से बेहतर रही है।
MP Rainfall: किस जिले में कितनी बारिश?
बारिश के आंकड़ों को आसान तरीके से समझें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश मऊगंज में हुई है।
50 इंच से ज्यादा बारिश:
मऊगंज में करीब 53 इंच बारिश दर्ज की गई है।
40 से 50 इंच बारिश:
मंडला, पन्ना, निवाड़ी, मैहर, सीधी, सतना, शहडोल और उमरिया में 40 से 50 इंच के बीच पानी गिरा है।
30 से 40 इंच बारिश:
भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, शिवपुरी, गुना, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, रीवा, सिंगरौली और अनूपपुर जैसे जिलों में 30 से 40 इंच तक बारिश हुई है।
20 से 30 इंच बारिश:
विदिशा, इंदौर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, ग्वालियर, अशोकनगर, दतिया, भिंड, श्योपुर, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में 20 से 30 इंच के बीच बारिश दर्ज की गई है।
20 इंच से कम बारिश:
धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, रतलाम और मुरैना में बारिश का आंकड़ा 20 इंच से नीचे है।
आने वाले सप्ताह में कैसा रहेगा MP का मौसम?

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश के बाद अब पश्चिमी हिस्से में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिली हैं। इससे प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े में सुधार हुआ है।
आने वाले दिनों में भी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश होने की संभावना बनी हुई है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। ऐसे में जिन जिलों में बारिश की कमी है, वहां आंकड़े में सुधार होने की उम्मीद है।
हालांकि, बारिश की तीव्रता और स्थान के अनुसार मौसम में बदलाव हो सकता है। इसलिए भारी बारिश वाले इलाकों में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी है।
भोपाल का मौसम: कोटा पूरा, आगे भी बारिश के आसार
राजधानी भोपाल में इस मानसून सीजन में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। यहां करीब 101 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है।
राजगढ़ में भी करीब 36 इंच बारिश के साथ सीजनल कोटा पूरा हो गया है। सीहोर, रायसेन और विदिशा में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई है।
आने वाले सप्ताह में भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की संभावना है। अगर तेज बारिश होती है तो राजधानी में सीजनल आंकड़ा सामान्य से और ऊपर जा सकता है।
इंदौर में अभी बारिश की कमी
इंदौर में इस मानसून सीजन में करीब 21.6 इंच बारिश हुई है। यह सामान्य कोटे की तुलना में करीब 63 प्रतिशत के आसपास है।
पिछले सप्ताह इंदौर में तेज बारिश नहीं होने के कारण बारिश की कमी बनी रही। संभाग के कुछ दूसरे जिलों में स्थिति इससे बेहतर है। बुरहानपुर में करीब 27.9 इंच बारिश दर्ज की गई है।
इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो कमी कुछ कम हो सकती है, लेकिन फिलहाल इस क्षेत्र में मानसून की सक्रियता बाकी हिस्सों की तुलना में कमजोर रही है।
जबलपुर में बारिश के आंकड़े में सुधार
जबलपुर के लिए पिछला सप्ताह बारिश के लिहाज से अच्छा रहा। लगातार बारिश के कारण जिले का कुल आंकड़ा करीब 33 इंच तक पहुंच गया है।
जबलपुर संभाग के मंडला में करीब 41.8 इंच, डिंडौरी में करीब 40 इंच और बालाघाट में लगभग 39.9 इंच बारिश दर्ज की गई है।
अगर आने वाले दिनों में बारिश जारी रहती है तो इस क्षेत्र में सीजनल आंकड़ा और बेहतर हो सकता है।
उज्जैन में 22.4 इंच बारिश
उज्जैन में अब तक करीब 22.4 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य कोटे की तुलना में करीब 64 प्रतिशत के आसपास है।
देवास में 27 इंच से ज्यादा बारिश हुई है, जबकि रतलाम में बारिश का आंकड़ा 20 इंच से नीचे है। उज्जैन संभाग में बारिश की स्थिति जिले-दर-जिले अलग बनी हुई है।
फिलहाल इस सप्ताह उज्जैन में बहुत तेज बारिश की संभावना दूसरे क्षेत्रों की तुलना में कम बताई जा रही है।
ग्वालियर में कोटे के करीब पहुंची बारिश
ग्वालियर में मानसून का आंकड़ा सामान्य बारिश के काफी करीब पहुंच गया है। यहां अब तक करीब 27 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य कोटे का लगभग 94 प्रतिशत है।
शिवपुरी में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। वहीं गुना और दतिया में अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो इन जिलों में भी सामान्य से ज्यादा बारिश का आंकड़ा दर्ज हो सकता है।
MP Monsoon Update: इस बार मानसून का अब तक का हाल
मध्य प्रदेश में मानसून की शुरुआत भले ही देरी से हुई थी, लेकिन जुलाई और अगस्त में हुई अच्छी बारिश ने शुरुआती कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया। सितंबर के पहले सप्ताह में भी कई जिलों में तेज बारिश हुई, जिसके कारण प्रदेश का कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया है।
फिलहाल राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से ज्यादा है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अभी भी कमी बनी हुई है। आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता यह तय करेगी कि प्रदेश इस सीजन में सामान्य बारिश का आंकड़ा पार करता है या नहीं।
नोट: बारिश के आंकड़े मौसम विभाग/उपलब्ध रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों पर आधारित हैं। मौसम की स्थिति और बारिश के आंकड़े लगातार बदल सकते हैं।
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