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जून में बारिश का बड़ा संकट: 126 साल में दूसरा सबसे सूखा महीना, कई राज्यों में हीटवेव का खतरा

देश में जून 2026 पिछले 126 वर्षों के रिकॉर्ड में दूसरा सबसे सूखा जून साबित हो रहा है। 21 जून तक सामान्य से 42% कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि राजस्थान में ओलावृष्टि देखने को मिली।

Monsoon Rainfall Deficit June 2026
Updated: 6/22/2026, 3:21:28 AM
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126 साल में दूसरा सबसे सूखा जून, देशभर में 42% कम बारिश

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देश में मानसून की रफ्तार थमने से जून 2026 मौसम के रिकॉर्ड में दर्ज होने जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार 21 जून तक देश में केवल 57.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 42.2 प्रतिशत कम है। यह पिछले 126 वर्षों में जून का दूसरा सबसे सूखा दौर माना जा रहा है।

इससे पहले वर्ष 2009 में जून के दौरान सामान्य से 49 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसका असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला था।

दो सप्ताह बाद आगे बढ़ सकता है मानसून

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हुआ है, जिसकी वजह से मानसून आने वाले दिनों में फिर से गति पकड़ सकता है। अनुमान है कि यह सिस्टम मानसून को छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के अन्य हिस्सों तक आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश इस साल के मानसून सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

मेघालय में रिकॉर्ड बारिश, राजस्थान में गिरे ओले

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जहां देश के कई हिस्से बारिश के इंतजार में हैं, वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है।

मेघालय के खासी हिल्स जिले के मॉसिनराम में 24 घंटे के भीतर 530 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा राजस्थान के कई शुष्क क्षेत्रों में लगभग छह महीने की औसत बारिश के बराबर है।

वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर में रविवार को बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई।

एमपी और यूपी में हीटवेव का अलर्ट

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बारिश की कमी का असर मध्य और उत्तर भारत में साफ दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है।

उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।

रात में भी राहत नहीं, विदर्भ में गर्म हवाएं

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थिति और गंभीर बनी हुई है। यहां के आठ जिलों में दिन के साथ-साथ रात में भी गर्म हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार उच्च तापमान के कारण लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है।

देश के सबसे गर्म शहरों में यूपी आगे

उत्तर प्रदेश का बांदा लगातार दूसरे दिन देश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

इसके अलावा कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और बहराइच में भी तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच गया। राजस्थान के श्रीगंगानगर और हरियाणा के रोहतक में भी भीषण गर्मी दर्ज की गई।

मानसून की देरी का खेती पर असर

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कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी दिखाई देने लगा है।

12 जून तक खरीफ बुआई का कुल रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 3.9 प्रतिशत घटकर 84.6 लाख हेक्टेयर रह गया है।

दालों की बुआई में 43.2 प्रतिशत और कपास की खेती में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि धान की बुआई में 28.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जलाशयों में अभी पर्याप्त पानी

हालांकि राहत की बात यह है कि देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर अभी भी सामान्य से बेहतर बना हुआ है।

मौजूदा समय में जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का 28.3 प्रतिशत पानी मौजूद है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अतिरिक्त जल भंडारण किसानों के लिए फिलहाल राहत का काम कर सकता है।

अगले दो दिनों का मौसम

23 जून

असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में मानसून सक्रिय रहने से तेज बारिश हो सकती है।

वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ में हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है।

24 जून

असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का अनुमान है।

सिक्किम, तेलंगाना, कोंकण-गोवा और तटीय कर्नाटक में भी तेज बारिश की संभावना जताई गई है।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ में लू का असर जारी रहने की चेतावनी जारी की गई है।

जून 2026 में बारिश की भारी कमी ने मौसम वैज्ञानिकों और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून फिर से सक्रिय होगा। अब देश की नजर जुलाई और अगस्त की बारिश पर टिकी हुई है, क्योंकि यही तय करेगी कि खेती, जल संसाधन और खाद्य महंगाई पर इस मौसम का कितना असर पड़ेगा।

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