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भोपाल मास्टर प्लान 2047: भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट को लेकर किसानों और रहवासियों ने विरोध जताया है। मुगालिया छाप के किसानों ने कृषि भूमि को ग्रीन बेल्ट, फॉरेस्ट और रिवरफ्रंट जैसी श्रेणियों में शामिल करने पर आपत्ति उठाई। वहीं, मिसरोद के रहवासियों ने पुरानी आबादी के बीच प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क हटाने की मांग की। इसके अलावा, शहर के अलग-अलग इलाकों के लोगों ने करीब 2 हजार आपत्तियां दर्ज कराईं।
66 गांवों की कृषि भूमि प्रभावित होने की आशंका
मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने भोपाल आ रहे मुगालिया छाप के किसानों को पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इसके बाद किसान सड़क पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की।
किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित योजना से 66 गांवों की कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है, जिससे खेती और आजीविका पर असर पड़ेगा। उन्होंने दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा एक महीने बढ़ाने की मांग भी की है।
टीएनसीपी की सहायक संचालक इंदू त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन दर्ज करने के बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
मिसरोद में 45 मीटर चौड़ी सड़क का विरोध

मिसरोद के रहवासियों ने खसरा नंबर 205 से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को योजना से हटाने की मांग करते हुए टीएनसीपी विभाग को लिखित आपत्तियां सौंपीं। उनका कहना है कि सड़क से पुराने मकानों, सैकड़ों परिवारों, मंदिरों और क्षेत्र के सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है।
रहवासियों ने शासकीय अस्पताल, सेवा सहकारी समिति, लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही, क्षेत्र के पुराने पीपल और बरगद के पेड़ों को बचाने तथा वैकल्पिक मार्ग का तकनीकी सर्वे कराने का आग्रह किया है।
शहर के कई इलाकों से करीब 2 हजार आपत्तियां
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़ियाकलां, साकेत नगर, कोलार रोड, शाहपुरा और अन्य क्षेत्रों के रहवासियों ने भी आपत्तियां दर्ज कराईं।
रहवासियों ने तालाबों, जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण के साथ आवासीय क्षेत्रों के मूल स्वरूप को बनाए रखने की मांग की। उन्होंने ड्राफ्ट में आवासीय परिसरों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने संबंधी प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे प्रावधानों से यातायात, पार्किंग, हरियाली और नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
किसानों और रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि भोपाल विकास योजना-2047 को अंतिम रूप देने से पहले उनकी आपत्तियों पर सुनवाई की जाए और कृषि भूमि, पुरानी आबादी, पर्यावरण तथा सार्वजनिक संस्थानों के हितों को ध्यान में रखा जाए।
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