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SIR में नाम कटा तो घर आएंगे अधिकारी
SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर बढ़ते विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं को राहत देने वाला फैसला लिया है।
आयोग के मुताबिक, जिन लोगों के नाम मैप नहीं होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस में आए हैं, उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए हर बार चुनाव कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। Booth Level Officer यानी BLO उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकेंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे।
इसके बाद संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) दावे और दस्तावेजों की जांच कर फैसला करेगा।
30 राज्यों/UT में 13.37 करोड़ नाम कम

SIR के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 13 करोड़ से ज्यादा नाम कम हुए हैं। Indian Express के मुताबिक यह संख्या करीब 13.37 करोड़ है।
यह संख्या ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में हुई कमी को दिखाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी लोगों का वोट देने का अधिकार स्थायी रूप से खत्म हो गया है। जिन लोगों का नाम छूटा है, उन्हें दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय दिया है।
दिल्ली में 30 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल किए जा सकेंगे, जबकि संबंधित मामलों का निपटारा 30 नवंबर तक किया जाना है।
महाराष्ट्र में भी दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के लिए समय बढ़ाया गया है।
Form 6 को लेकर EC ने स्थिति साफ की

वोटर लिस्ट में नया नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर भी चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है।
आयोग ने कहा है कि SIR के दौरान Form 6 से जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप रखा गया है। वहीं सामान्य अवधि में Form 6 का वही प्रारूप इस्तेमाल होगा, जो Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित है।
नाम SIR में छूट गया है तो संबंधित ERO के सामने Form 6 के जरिए नाम शामिल कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर भी विवाद
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट में SIR, वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण और Form 6 से जुड़े बदलावों पर दोनों आयुक्तों की चिंताओं का उल्लेख किया गया।
चुनाव आयोग ने जवाब में कहा है कि आयोग में अलग-अलग विचार निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और पिछले एक साल में लिए गए फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।
आयुक्तों के लेटर पर EC ने दी सफाई
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र SIR या किसी चुनावी फैसले से संबंधित नहीं थे। आयोग के अनुसार, ये पत्र आयोग में प्रतिनियुक्त एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े विषय पर थे।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए हैं और उनके इस्तीफे की मांग की है।
अगर SIR में नाम नहीं है तो क्या करें?
अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं है या आपको SIR से संबंधित नोटिस मिला है, तो:
- अपने BLO से संपर्क करें।
- नोटिस में दिए कारण को देखें।
- जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
- BLO के जरिए दस्तावेज जमा कराएं या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ERO के सामने दावा दाखिल करें।
- नाम जोड़ने के लिए जरूरत पड़ने पर Form 6 का इस्तेमाल करें।
चुनाव आयोग की नई व्यवस्था के बाद कई मामलों में BLO घर जाकर दस्तावेज लेने और उन्हें ऑनलाइन अपलोड करने में मदद कर सकेंगे।
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