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लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा गठित नई उच्चस्तरीय शिक्षा सुधार समिति पर सवाल उठाते हुए उसके एक सदस्य को लेकर टिप्पणी की। इस टिप्पणी पर भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार ने पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 संसद में पेश किया है।
इसके तहत शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (शिक्षा सुधार समिति) का गठन किया गया है।
इस समिति में कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें:
- नंदन नीलेकणी
- इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ
- पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका
- आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि
- पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
- अमृत लाल मीणा
शामिल हैं।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ तो हैं, लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक सदस्य का उल्लेख "गोमूत्र विशेषज्ञ" के रूप में किया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
मीडिया रिपोर्टों में इस टिप्पणी को आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि से जोड़कर देखा गया, जो पहले गोमूत्र के कथित औषधीय गुणों पर दिए गए अपने बयान के कारण चर्चा में रह चुके हैं।
अनुराग ठाकुर ने जताई आपत्ति
प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने कहा कि किसी प्रतिष्ठित शिक्षाविद के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग उचित नहीं है और इससे उनके योगदान का अपमान होता है।
भाजपा सांसदों ने भी इस टिप्पणी का विरोध किया, जिसके बाद सदन में हंगामा देखने को मिला।
शिक्षा सुधार समिति का उद्देश्य
सरकार के अनुसार, नई समिति का उद्देश्य:
- पेपर लीक रोकने के लिए सुझाव देना।
- परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना।
- तकनीकी सुधारों की सिफारिश करना।
- भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में विश्वास बहाल करना।
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