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भोपाल के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की तैयारी में सरकार:लैंडयूज में बदलाव का प्रस्ताव आया, तो भी नहीं हटेगी सीलिंग; 23 नवंबर को अगली सुनवाई

भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई की। इसके बाद सरकार मास्टर प्लान के ड्राफ्ट जारी करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, प्लान में लैंडयूज का प्रस्ताव आया तो भी सीलिंग नहीं हटेंगी। इस मामले

चुनिंदा कार्रवाई और लापरवाही पर कोर्ट सख्त
Updated: 9/26/2026, 7:37:18 AM
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भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के बाद स्पष्ट आदेश जारी किया है। कोर्ट ने 21 साल से लंबित नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की मंजूरी तो दे दी है, लेकिन यह साफ कर दिया है कि नए प्लान के प्रस्तावों के आधार पर पुराने अवैध निर्माण या मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियां स्वतः वैध नहीं होंगी। यानी जब तक अंतिम मास्टर प्लान लागू नहीं होता, तब तक सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी

अदालत के आदेश के अनुसार, किसी भी परिसर या दुकान की वैधता को वर्तमान में लागू 2005 के मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर ही परखा जाएगा। सरकार भले ही नया ड्राफ्ट जारी कर जनता से दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) मंगाए, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को इससे कोई तात्कालिक सुरक्षा या राहत नहीं मिलेगी

कार्रवाई तय: जो क्षेत्र मास्टर प्लान में विशेष रूप से केवल 'आवासीय' (Residential) उपयोग के लिए निर्धारित हैं, वहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि मिलने पर परिसर को तुरंत सील किया जाएगा

कोर्ट ने उन क्षेत्रों को अलग माना है जहां लैंडयूज स्पष्ट नहीं है या मिश्रित उपयोग का प्रस्ताव है। ऐसे क्षेत्रों में फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनी रहेगी और वहां नगर निगम की सीलिंग की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा

चुनिंदा कार्रवाई और लापरवाही पर कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) ने शिकायत की थी कि भोपाल नगर निगम दिन में दुकानें सील करता है और वे शाम या रात को फिर खुल जाती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं:

मुकदमेबाजी से रुकावट नहीं: यदि किसी संपत्ति का मालिकाना हक या अन्य कोई विवाद कोर्ट में लंबित है, तो भी उसे सीलिंग से छूट नहीं मिलेगी, बशर्ते उसका उपयोग अलॉटमेंट या स्वीकृत नक्शे के विपरीत हो रहा हो

अंतिम मास्टर प्लान के लिए सुप्रीम कोर्ट की मुहर जरूरी

राज्य सरकार ड्राफ्ट तैयार कर दावे-आपत्तियां आमंत्रित करेगी, लेकिन फाइनल मास्टर प्लान का प्रकाशन करने से पहले पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। शीर्ष अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही इसे अंतिम रूप से लागू किया जा सकेगा।

यदि आप इस मामले के किसी खास पहलू के बारे में जानना चाहते हैं, तो मुझे बताएं:

क्या आपको नगर निगम द्वारा अब तक सील किए गए प्रतिष्ठानों के आंकड़ों या नोटिस की जानकारी चाहिए?

क्या आप अरेरा कॉलोनी या रोहित नगर जैसे विशिष्ट प्रभावित इलाकों में चल रही कार्रवाई की स्थिति जानना चाहते हैं?

क्या आप व्यापारियों (Chamber of Commerce) के विरोध और उनकी मांगों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?

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