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MP सुगम परिवहन सेवा पर सवाल: रंग बदला, हाल वही? कांग्रेस ने कहा- ‘खटारा बसों’ को दिखाई हरी झंडी

शॉर्ट समरी: मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी के साथ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू हो गई है। 25 सितंबर को भोपाल से 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाई गई। जहां सरकार इसे आधुनिक और सुगम सार्वजनिक परिवहन की शुरुआत बता रही है, वहीं कांग्रेस ने कुछ पुरानी सिटी बसों की हालत और उनके रंग-रोगन को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर भी पुरानी बसों के नए रंग में सामने आने को लेकर चर्चा है।

MP Sugam Parivahan Seva
Updated: 9/26/2026, 5:04:08 AM
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21 साल बाद MP में सरकारी बस सेवा की वापसी

मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सरकारी सार्वजनिक बस सेवा की औपचारिक वापसी हुई है। 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत की।

पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है। इन सात शहरों के लिए कुल 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें शुरू की गई हैं। उपलब्ध सरकारी जानकारी के मुताबिक इनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें हैं।

सरकार का लक्ष्य इस नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में फैलाना है। योजना के तहत 2031 तक करीब 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।

बस सेवा शुरू होते ही पुरानी बसों पर उठे सवाल

नई बस सेवा के शुभारंभ के बाद सोशल मीडिया पर कुछ पुरानी सिटी बसों की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में आए। इन्हीं को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुरानी बसों को नया रंग देकर सुगम परिवहन सेवा में शामिल किया गया है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में इन बसों को “खटारा बसें” बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा उन्हें हरी झंडी दिखाए जाने पर सवाल उठाया।

हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। बसों की वास्तविक तकनीकी स्थिति, फिटनेस और संचालन मानकों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित परिवहन और नगरीय निकाय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

भोपाल की पुरानी सिटी बसों को भी नई व्यवस्था में शामिल किया गया

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विवाद का एक कारण यह भी है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में केवल बिल्कुल नई बसें ही शामिल नहीं हैं। पहले से अलग-अलग शहरों में चल रही सिटी बस सेवाओं को भी नई व्यवस्था के तहत एकीकृत किया जा रहा है।

भोपाल में पहले सिटी बस सेवा भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के माध्यम से संचालित होती थी। नई व्यवस्था में बस संचालन को मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के ढांचे में लाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने पहले ही प्रदेश में सात सहायक कंपनियों के गठन की व्यवस्था की थी। इनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर की सिटी बस कंपनियों से जुड़ा ढांचा शामिल है।

पुराने रंग की जगह ऑरेंज कलर और रेडियम

नई व्यवस्था के तहत पुरानी बसों को एकरूप लुक देने के लिए उनके बाहरी हिस्से पर नया रंग और रेडियम लगाया गया है। यही बदलाव अब विवाद का विषय बन गया है।

कांग्रेस का आरोप है कि कुछ बसों में केवल बाहरी रंग-रोगन किया गया, जबकि उनकी अंदरूनी स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ।

कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें बस की बॉडी पर लगाया गया रेडियम निकलता हुआ दिखाई देने का दावा किया गया है।

हालांकि, वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर सभी 351 बसों की स्थिति के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए प्रत्येक बस की फिटनेस, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और निरीक्षण रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

कांग्रेस ने टेंडर को लेकर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला और अभिनव बारोलिया ने बसों के रंग-रोगन और रेडियम से जुड़े काम को लेकर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता की ओर से दावा किया गया कि संबंधित काम का टेंडर पोर्टल पर प्रक्रिया में था और एजेंसी फाइनल होने से पहले ही बसों पर काम कर दिया गया।

इसे लेकर कांग्रेस ने सरकार और परिवहन व्यवस्था में कथित अनियमितता के आरोप लगाए हैं।

हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए संबंधित टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, भुगतान रिकॉर्ड और काम पूरा होने की तारीख को देखना जरूरी होगा। इसलिए फिलहाल इसे कांग्रेस का आरोप ही माना जाना चाहिए।

सरकार का कहना- सभी बसों को एकरूपता देने के लिए किया गया बदलाव

बसों के रंग और नई व्यवस्था को लेकर प्रशासन की ओर से कहा गया है कि अलग-अलग एजेंसियों के तहत चल रही बसों को एक ही परिवहन व्यवस्था में लाने के बाद एकरूपता के लिए रंग और पहचान संबंधी बदलाव किए गए हैं।

भोपाल की बसों को नई व्यवस्था के तहत मध्यप्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन लाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी प्रक्रिया के तहत बसों के बाहरी स्वरूप को भी एक जैसा किया गया।

इसका उद्देश्य यात्रियों को बसों की पहचान और नई सरकारी परिवहन व्यवस्था से जोड़ना बताया गया है।

सरकार ने बसों में CCTV, पैनिक बटन और GPS का किया दावा

सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में पेश किया गया है।

सरकारी जानकारी के मुताबिक बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे, पैनिक बटन, इमरजेंसी डोर और GPS आधारित लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं रखी गई हैं।

बसों के संचालन और लोकेशन की रियल टाइम निगरानी के लिए Intelligent Transport Management System यानी ITMS का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं।

ऐसे में पुरानी बसों को लेकर उठे सवालों के बीच यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले से संचालित बसों में घोषित सुरक्षा उपकरण वास्तव में कितने सक्रिय और कार्यशील हैं।

180 इलेक्ट्रिक बसें भी सेवा में शामिल

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के तहत इलेक्ट्रिक बसों को भी परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती चरण में 180 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इनका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना और डीजल पर निर्भरता कम करना है।

सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से आने वाले वर्षों में प्रदूषण और ईंधन खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।

2031 तक 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को केवल सात शहरों तक सीमित नहीं रखा जाना है। सरकार ने इसका चरणबद्ध विस्तार करने की योजना बनाई है।

सरकारी योजना के मुताबिक पहले वर्ष करीब 1,500 बसें संचालित करने का लक्ष्य है। इसके बाद हर साल लगभग 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने और वर्ष 2031 तक करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करने की योजना है।

साथ ही प्रदेश की बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों को बस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ग्रामीण इलाकों से शहरों तक आने-जाने की सुविधा बेहतर हो सके।

अब असली सवाल बसों की उम्र नहीं, मेंटेनेंस और फिटनेस का भी है

नई सरकारी बस सेवा शुरू होने के बाद विवाद केवल बसों के रंग तक सीमित नहीं है। यात्रियों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल बसों की फिटनेस, सुरक्षा, मेंटेनेंस और नियमित निरीक्षण से जुड़े हैं।

यदि पुरानी बसों को नई व्यवस्था में शामिल किया गया है, तो उनके लिए निर्धारित फिटनेस मानकों, मेंटेनेंस शेड्यूल और सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच जरूरी होगी।

वहीं, अगर किसी बस में CCTV, पैनिक बटन या अन्य सुरक्षा उपकरण काम नहीं कर रहे हैं, तो उसकी शिकायत और सुधार के लिए प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी होगी।

यात्रियों के लिए नई बस सेवा में क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था का उद्देश्य शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों को भी सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है। शुरुआती चरण में इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों तरह की बसें चलाई जा रही हैं।

बस संचालन की निगरानी, ऑनलाइन टिकटिंग, GPS ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं को एकीकृत करने की योजना है।

सरकार के अनुसार, इससे यात्रियों को बसों की उपलब्धता और समय की जानकारी बेहतर तरीके से मिल सकेगी और परिवहन व्यवस्था की निगरानी भी की जा सकेगी।

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