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Cocktail 2 Review: शानदार विजुअल्स, लेकिन इमोशन में कमी
बॉलीवुड की चर्चित फिल्म 'Cocktail' के 14 साल बाद आए सीक्वल 'Cocktail 2' से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। पहली फिल्म ने दोस्ती, प्यार और रिश्तों की जटिलताओं को बेहद खूबसूरती से दिखाया था। खासकर दीपिका पादुकोण का वेरोनिका वाला किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।
लेकिन 'Cocktail 2' उस जादू को दोहराने में पूरी तरह सफल नजर नहीं आती।
कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी इटली के खूबसूरत शहर सिसिली में सेट की गई है।
कुणाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) पिछले 10 सालों से रिश्ते में हैं। दोनों ने लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप और कई मुश्किल दौर साथ में पार किए हैं। लेकिन उनकी जिंदगी में एली (कृति सेनन) की एंट्री सब कुछ बदल देती है।
दिया अपने रिश्ते की सच्चाई जानने के लिए एली से कुणाल को आकर्षित करने की बात कहती है। यहीं से शुरू होता है प्यार, भ्रम, असुरक्षा और भावनाओं का खेल।
कहानी की सबसे बड़ी कमजोरी

फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसकी स्क्रिप्ट है।
रिश्तों को परखने के लिए बनाया गया पूरा "लॉयल्टी टेस्ट" काफी बनावटी लगता है। कई जगह कहानी अपनी ही लॉजिक से भटकती नजर आती है।
पहली फिल्म में जहां रिश्तों का दर्द और भावनाएं दिल को छूती थीं, वहीं यहां सब कुछ सतही महसूस होता है।
शाहिद कपूर ने संभाली फिल्म
अगर फिल्म में कोई सबसे ज्यादा प्रभावित करता है तो वह शाहिद कपूर हैं।
उन्होंने कुणाल के किरदार में परिपक्वता और भावनात्मक संतुलन दिखाने की कोशिश की है। कई भावुक दृश्यों में उनका अभिनय फिल्म को संभालता है।
विशेषकर एक सीन में जब वह सच्चे प्यार की तुलना पुराने बिखरे हुए अलमारी से करते हैं, तब उनका अभिनय असर छोड़ता है।
रश्मिका मंदाना की परफॉर्मेंस
रश्मिका मंदाना अपने किरदार में ईमानदार लगती हैं, लेकिन उनकी हिंदी डायलॉग डिलीवरी कई बार किरदार की विश्वसनीयता को कमजोर करती है।
भावनात्मक दृश्यों में उनकी आंखें काफी कुछ कहती हैं, लेकिन भाषा और उच्चारण कई जगह दर्शकों को कहानी से जोड़ नहीं पाते।
कृति सेनन और वेरोनिका की तुलना

कृति सेनन का किरदार एली काफी हद तक पहली फिल्म की वेरोनिका की याद दिलाता है।
हालांकि तुलना होना स्वाभाविक है, लेकिन कृति उस बिंदास और बिखरे हुए आकर्षण को पूरी तरह नहीं पकड़ पातीं जिसने दीपिका पादुकोण के वेरोनिका किरदार को यादगार बनाया था।
कृति ने अच्छा अभिनय किया है, लेकिन किरदार में वह जंगलीपन और अनिश्चितता नहीं दिखती जो पहली फिल्म की आत्मा थी।
म्यूजिक बना फिल्म की जान
फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी इसका संगीत है।
प्रीतम का संगीत फिल्म में जान डालने का काम करता है। 'मशूका' और 'जब तलक' जैसे गाने फिल्म के मूड को बेहतर तरीके से पेश करते हैं।
कई जगह ऐसा महसूस होता है कि फिल्म का संगीत कहानी से ज्यादा असर छोड़ता है।
विजुअल्स शानदार लेकिन कहानी कमजोर
सिसिली की खूबसूरत लोकेशंस, शानदार सिनेमेटोग्राफी और फैशनेबल प्रेजेंटेशन फिल्म को विजुअली आकर्षक बनाते हैं।
लेकिन सिर्फ खूबसूरत लोकेशंस किसी रोमांटिक ड्रामा को सफल नहीं बना सकतीं। कहानी और किरदारों की गहराई की कमी साफ महसूस होती है।
क्या देखनी चाहिए फिल्म?
अगर आप शाहिद कपूर के फैन हैं या रोमांटिक ड्रामा पसंद करते हैं, तो फिल्म एक बार देख सकते हैं।
लेकिन अगर आप पहली 'Cocktail' जैसी गहरी और यादगार प्रेम कहानी की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद थोड़ी निराशा हाथ लगे।
'Cocktail 2' एक ऐसी फिल्म है जो दिखने में खूबसूरत है, लेकिन भावनात्मक स्तर पर ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाती।
शाहिद कपूर और प्रीतम का संगीत फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर कहानी और अधूरे किरदार इसे औसत फिल्म बना देते हैं।
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