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बड़ा तालाब (अपर लेक) में सिंघाड़े की खेती के दौरान कथित रूप से कीटनाशकों के इस्तेमाल और तालाब के पारिस्थितिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के एक मामले को एनजीटी ने स्वत: संज्ञान में लिया। न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई की।
एक रिपोर्ट में तालाब में सिंघाड़े की फसल पर रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव और जलकुंभी के तेजी से फैलने को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। बड़ा तालाब से भोपाल की बड़ी आबादी को पेयजल की आपूर्ति होती है। रिपोर्ट में जलकुंभी के कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होने और जलीय जीवों को संभावित नुकसान की आशंका भी जताई गई थी।
इसके बाद एनजीटी ने संयुक्त समिति गठित की। जिसमें वेटलैंड प्राधिकरण, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल थे। इस टीम ने तालाब का निरीक्षण किया और जल के नमूने लेकर उनका विश्लेषण कराया था।
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 को बैरागढ़ स्थित बोर वन पार्क के निकट निरीक्षण के दौरान सिंघाड़े और कमल की खेती देखी गई। हालांकि, निरीक्षण के समय कीटनाशकों का छिड़काव करते हुए कोई व्यक्ति अथवा छिड़काव संबंधी उपकरण नहीं पाया गया। निरीक्षण स्थल पर मृत मछलियां भी नहीं देखी गईं।
पानी की जांच भी की
टीम ने 1 अक्टूबर को लिए गए जल नमूने में घुलित ऑक्सीजन (DO) 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर, जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) 2.4 मिलीग्राम प्रति लीटर और रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) 9.6 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। विश्लेषित नमूने में फीकल कोलीफॉर्म और कीटनाशक अवशेष नहीं पाए गए।
जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान बैरागढ़ इंटेक वेल पर उपलब्ध निगरानी आंकड़ों के अनुसार, घुलित ऑक्सीजन का औसत स्तर लगभग 6.49 मिलीग्राम प्रति लीटर और BOD का औसत स्तर लगभग 1.45 मिलीग्राम प्रति लीटर था। संबंधित विश्लेषणों में कीटनाशक अवशेष और भारी धातुएं भी नहीं पाई गईं। हालांकि, अधिकरण ने यह महत्वपूर्ण पहलू भी दर्ज किया कि किसी एक स्थान और समय पर लिए गए जल नमूने के परिणामों के आधार पर पूरे तालाब में कीटनाशकों के इस्तेमाल की मौजूदगी या अनुपस्थिति के संबंध में निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मत्स्य विभाग ने एनजीटी को बताया कि अपर लेक में सिंघाड़े की खेती के लिए विभाग द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है और न ही इस संबंध में पट्टे की अनुशंसा की गई है। विभाग ने यह भी बताया कि जलकुंभी का घना फैलाव तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है और घुलित ऑक्सीजन में कमी से छोटी मछलियों की मृत्यु का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने यह दिए निर्देश
सिंघाड़े की खेती का नियमन: भोपाल नगर निगम और कृषि विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि अपर लेक में सिंघाड़े की खेती लागू अनुमतियों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के अनुरूप ही की जाए। भोज वेटलैंड के प्रभाव क्षेत्र में गतिविधियों से संबंधित मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग के 16 मार्च 2022 के आदेश में निर्धारित प्रावधानों और शर्तों का भी पालन किया जाए।
सिंघाड़े की जांच: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) को निर्देश दिए कि वह कीटनाशकों के छिड़काव से उत्पन्न संभावित कीटनाशक अवशेषों और हानिकारक रसायनों के लिए सिंघाड़े का विश्लेषण करें। खाद्य सुरक्षा पर उनके प्रभावों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करें।
जैविक खेती के प्रति जागरूकता: मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। जिनका उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना और रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को हतोत्साहित करना होगा। इन कार्यक्रमों में जल गुणवत्ता और जलीय जीवों पर कीटनाशकों के संभावित प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
जल की नियमित जांच: मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एहतियाती उपाय के रूप में बड़े तालाब के जल की नियमित जांच करेगा। ताकि कीटनाशक अवशेषों की मौजूदगी की निगरानी की जा सके।
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