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E20 Petrol पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान: पुरानी गाड़ियों के खराब पार्ट्स मुफ्त बदलेंगी कंपनियां, माइलेज कम होने की बात मानी
देश में E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) इस्तेमाल करने से पुरानी गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन के कुछ पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। अब इस मुद्दे पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है।
गडकरी ने कहा कि सरकार ने वाहन निर्माताओं को निर्देश दिए हैं कि यदि 2023 से पहले बनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल के कारण कुछ रबर आधारित पार्ट्स बदलने की जरूरत पड़े, तो उन्हें ग्राहकों से बिना कोई अतिरिक्त शुल्क लिए बदला जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल से गाड़ियों के खराब होने की कई खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
E20 पेट्रोल से प्रभावित पुरानी गाड़ियों के पार्ट्स मुफ्त बदलेंगे

नितिन गडकरी के अनुसार, पुरानी गाड़ियों में सर्विसिंग के दौरान जिन रबर वॉशर्स या अन्य रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत होगी, उन्हें वाहन कंपनियां मुफ्त में बदलेंगी। सरकार ने इस संबंध में ऑटोमोबाइल कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं ताकि ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
उन्होंने बताया कि पहले कई वाहनों में धातु के वॉशर्स का उपयोग किया जाता था, जबकि अब नई तकनीक के तहत रबर आधारित पार्ट्स लगाए जा रहे हैं। ऐसे में जहां जरूरत होगी, वहां कंपनियां इन्हें बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के बदलेंगी।
क्या E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब होती हैं?
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इससे इंजन खराब हो जाता है या वाहन जल्दी खराब होने लगते हैं।
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि केवल E20 पेट्रोल की वजह से किसी गाड़ी का इंजन खराब हुआ हो। उन्होंने कहा कि इस तरह की कई बातें बिना ठोस आधार के सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं।
माइलेज कम होने की बात सरकार ने मानी

हालांकि गडकरी ने यह स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है।
उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Calorific Value) सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसी कारण कुछ परिस्थितियों में वाहन का माइलेज थोड़ा कम दिखाई दे सकता है। हालांकि यह अंतर वाहन की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल और सड़क की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
शहर और हाईवे पर माइलेज में क्यों आता है अंतर?

गडकरी के अनुसार, दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों में लगातार ट्रैफिक और बार-बार रुकने के कारण वाहन निचले गियर में चलते हैं, जिससे माइलेज स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है।
वहीं यदि वाहन हाईवे पर लगातार एक समान गति से चलता है, तो माइलेज का अंतर अपेक्षाकृत कम महसूस होता है।
गडकरी ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल इंजन विशेष रूप से एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे इंजनों में E20 या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण के कारण किसी विशेष समस्या की जानकारी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि भारत की कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं, जिससे भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग और आसान होगा।
भारत में E20 पेट्रोल का विरोध क्यों हो रहा है?
देश में E20 पेट्रोल का सबसे अधिक विरोध 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों की ओर से देखने को मिला है।
वाहन मालिकों का कहना है कि नई ईंधन नीति लागू होने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज पहले की तुलना में कम हो गया है। इसके अलावा कुछ लोगों ने मेंटेनेंस लागत बढ़ने और इंजन के कुछ पार्ट्स जल्दी खराब होने की भी शिकायत की है। हालांकि सरकार का कहना है कि इन दावों को लेकर अभी तक ऐसा कोई व्यापक तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है जो E20 पेट्रोल को सीधे जिम्मेदार ठहराता हो।
सरकार E20 पेट्रोल को क्यों बढ़ावा दे रही है?

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा एथेनॉल मिश्रण से प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखा गया है। सरकार आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
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