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बीजेपी विधायक ने हड़पी महाकाल मंदिर की जमीन, हाईकोर्ट पहुंचा केस

एमपी के एक बीजेपी विधायक पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की जमीन हड़पने का आरोप लगा है। आलोट के विधायक चिंतामणि मालवीय की इस मामले में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को शिकायत की गई है

बीजेपी विधायक ने हड़पी महाकाल मंदिर की जमीन, हाईकोर्ट पहुंचा केस
Updated: 5/19/2026, 7:44:58 AM
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बीजेपी विधायक ने हड़पी महाकाल मंदिर की जमीन, हाईकोर्ट पहुंचा केस

महाकाल मंदिर की पार्किंग की सरकारी जमीन को बताया निजी, विधायक चिंतामणि मालवीय के खिलाफ जनहित याचिका लगाई

एमपी के एक बीजेपी विधायक पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की जमीन हड़पने का आरोप लगा है। आलोट के विधायक चिंतामणि मालवीय की इस मामले में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को शिकायत की गई है। इतना ही नहीं, इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि फाइव स्टार होटल बनाने के लिए महाकाल मंदिर की पार्किंग की सरकारी जमीन हथियाई गई है। उनका कहना है कि खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 वर्ष 1950 और 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज थी। बाद में इसे निजी जमीन बताकर सौदा कर लिया। मामले में महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक का कहना है कि पार्किंग की जमीन नगर निगम की है। इधर विधायक चिंतामणि मालवीय ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उचित दस्तावेजों के आधार पर ही जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है।

शिकायतकर्ता पार्षद राजेंद्र कुवाल का आरोप है कि न केवल राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन को निजी बताया बल्कि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री में भी खासी गड़बड़ी की

सौदे में शामिल खसरों की कुछ जमीनों का अभी भी महाकाल मंदिर की पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता पार्षद राजेंद्र कुवाल का आरोप है कि न केवल राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन को निजी बताया बल्कि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री में भी खासी गड़बड़ी की गई है। कमर्शियल उपयोग की जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराई। कलेक्टर गाइडलाइन में 75400 रुपए प्रति वर्गमीटर के रेट तय हैं लेकिन रजिस्ट्री में 22500 रुपए प्रति वर्गमीटर दर्शाए गए हैं।

महाकाल मंदिर की जमीन की इस गड़बड़ी की लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को भी शिकायत

शिकायतकर्ता पार्षद राजेंद्र कुवाल ने मामले की प्रदेश के मुख्य सचिव को शिकायत की है। महाकाल मंदिर की जमीन की इस गड़बड़ी की लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को भी शिकायत की गई है। इसके साथ ही एमपी हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भी जनहित याचिका दायर की है। हाईकोर्ट से मामले की गहराई से जांच की मांग की गई है।

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