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Chandra Grahan 2026 LIVE: आज रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा के मौके पर साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगा है। यह ग्रहण आंशिक चंद्र ग्रहण है और इसका चरम काल सुबह 9:43 बजे रहा। ग्रहण का पहला उपच्छाया स्पर्श सुबह 6:55 बजे और प्रच्छाया से पहला स्पर्श सुबह 8:04 बजे हुआ था।
इस चंद्र ग्रहण की पूरी अवधि करीब 5 घंटे 35 मिनट बताई गई है, जबकि आंशिक यानी खंडग्रास चंद्र ग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 16 मिनट रही। अब ग्रहण के समापन का समय भी करीब है।
11:21 बजे खत्म होगा आंशिक चंद्र ग्रहण
आज के आंशिक चंद्र ग्रहण का प्रच्छाया से अंतिम स्पर्श सुबह 11:21 बजे होगा। इसके बाद चंद्रमा पृथ्वी की घनी छाया से बाहर निकल जाएगा।
हालांकि, ग्रहण पूरी तरह समाप्त दोपहर 12:30 बजे होगा। इस समय चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया से भी बाहर निकल जाएगा और इसके साथ ही ग्रहण की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी।
सुबह 9:43 बजे ग्रहण अपने चरम पर पहुंचा
सुबह 9:43 बजे चंद्र ग्रहण अपने चरम बिंदु पर पहुंचा। इसे परमग्रास का समय भी कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से सबसे ज्यादा ढका रहा।
आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की प्रच्छाया में आता है, जबकि बाकी हिस्सा रोशनी में रहता है। इसी वजह से चंद्रमा का एक भाग सामान्य से अलग दिखाई दे सकता है।
क्या आज सूतक काल मान्य है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले शुरू माना जाता है। हालांकि, सूतक काल तभी मान्य माना जाता है जब ग्रहण उस स्थान पर दिखाई दे।
सूतक के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है और कई मंदिरों के कपाट भी बंद रखे जाते हैं। इस चंद्र ग्रहण की स्थानीय दृश्यता के आधार पर ही सूतक के नियम लागू होने की स्थिति तय होती है।
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का क्या असर?

रक्षाबंधन के दिन ग्रहण होने के कारण लोगों के बीच राखी बांधने के समय को लेकर भी सवाल हैं। दी गई जानकारी के अनुसार रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रत्यक्ष असर नहीं माना जा रहा है, लेकिन राहुकाल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
आज राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचा जाता है।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। इनमें अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 बजे से 3:22 बजे तक और अमृत काल शाम 7:44 बजे से रात 9:23 बजे तक रहेगा।
दिन के शुभ चौघड़िया में अमृत-सर्वोत्तम सुबह 9:10 से 10:46 बजे और शुभ-उत्तम दोपहर 12:22 से 1:58 बजे तक रहेगा।
हालांकि, अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
चंद्र ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यता क्या है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को राहु-केतु की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत पीने वाले असुर का भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सिर काट दिया था।
अमृत का प्रभाव होने के कारण वह समाप्त नहीं हुआ और उसका सिर राहु तथा धड़ केतु कहलाया। मान्यता के अनुसार सूर्य और चंद्रमा द्वारा असुर की पहचान बताए जाने के कारण राहु उनसे बदला लेने का प्रयास करता है। इसी कथा को ग्रहण से जोड़कर देखा जाता है।
ग्रहण के दौरान क्या उपाय करने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी जाती है। रक्षाबंधन के मौके पर कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में पहले भगवान शिव को रक्षा सूत्र बांधने, फिर भगवान विष्णु और गुरु को रक्षा सूत्र अर्पित करने के बाद भाई को राखी बांधने की बात कही गई है।
ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
Chandra Grahan 2026: आज के ग्रहण की पूरी टाइमलाइन

चंद्र ग्रहण का उपच्छाया से पहला स्पर्श सुबह 6:55 बजे हुआ। इसके बाद सुबह 8:04 बजे प्रच्छाया से पहला स्पर्श हुआ और 9:43 बजे ग्रहण चरम पर पहुंचा।
अब 11:21 बजे प्रच्छाया से अंतिम स्पर्श होगा, जिसके बाद आंशिक ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे उपच्छाया से अंतिम स्पर्श के साथ चंद्र ग्रहण पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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