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अब इसे बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके।
26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है।
इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं होती। यह सुरंग के आकार, अंदर मौजूद हवा, लोगों की संख्या, ऑक्सीजन-CO₂ के स्तर, पानी, तापमान और लोगों की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। अंदर फंसे लोगों को क्या खतरा हो सकता है सामान्य हवा में करीब 20.9% ऑक्सीजन होती है। 19.5% से कम ऑक्सीजन को खतरनाक माना जाता है। बंद सुरंग में लोग सांस लेते हैं तो ऑक्सीजन घटती और CO₂ बढ़ती है। बाढ़ का पानी और कीचड़ सुरंग में भरने से सुरक्षित जगह कम हो सकती है। वहीं मलबा रास्ता बंद कर सकता है और सुरंग की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है।
अगर सुरंग में बाढ़ का पानी भर रहा है और कर्मचारी लंबे समय तक गीले और ठंडे माहौल में फंसे हैं, तो हाइपोथर्मिया यानी शरीर का तापमान खतरनाक रूप से गिरने का जोखिम बढ़ सकता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों के रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर आज 30 अगस्त शाम 5:30 बजे तक का अपडेट जारी किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रेस्क्यू किए गए 149 भारतीयों के नाम की एक लिस्ट सोशल मीडिया पर शेयर की।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, रविवार शाम तक 788 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,502 लोग लापता हैं।
NDRRMA के मुताबिक, लापता लोगों में 933 क्षेत्रीय जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 592 विदेशी नागरिक और विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिकों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है।
नेपाल के रसुवा जिले की 20 वर्षीय कोपिला तामांग ने बाढ़ में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। 2015 के भूकंप में उनका घर तबाह हुआ था, लेकिन इस बार बाढ़ उनके नए घर के साथ मां, बहन, दादी और एक महीने के भतीजे समेत कई परिजनों को भी बहा ले गई।
कोपिला ने CNN से कहा, “मैं खुद को बिल्कुल अकेला और खोया हुआ महसूस करती हूं।” उनका 7 साल का भाई अब भी मानता है कि उनकी मां वापस आएंगी।
नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 752 हो गई है। 2,502 लोग अभी भी लापता हैं।
बाढ़ में 239 लोग घायल हुए हैं, जबकि 8,730 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
नेपाल-चीन सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का ज्यादातर पानी प्राकृतिक रास्ते से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इससे निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है।
यह झील पिछले बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थी। लांगटांग री पर्वत क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे नदी का बहाव रुक गया और वहां पानी जमा होकर झील बन गई।
चीन के मुताबिक, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। आशंका थी कि प्राकृतिक बांध टूटने पर नेपाल और चीन के निचले इलाकों में फिर बड़ी बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से दोनों देशों की एजेंसियां लगातार झील की निगरानी कर रही थीं।
नेपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दोबारा जोड़ने के लिए भारत और चीन से कुल 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।
भारत ने अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके साथ ही सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए टनल विशेषज्ञों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी नेपाल भेजा गया है।
भारत ने कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट समेत राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इसके अलावा 230 फीट लंबे बेली ब्रिज बनाने के लिए सामान भी नेपाल पहुंचाए गए हैं। भारत जल्द ही 7 और बेली ब्रिज के लिए सामान और टेक्निकल टीम भेजेगा।
तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि वे तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहे थे। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। उन्हें बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ की तेज धारा में बह गईं और उनका कोई पता नहीं चला।
एलावेनी ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि रास्ते में इतनी बड़ी आपदा आने वाली है। उन्होंने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। खैर, हमें दर्शन नहीं मिले, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए।” उन्होंने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।
नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए चीन ने रविवार सुबह दो विमानों से राहत सामग्री और विशेषज्ञों की एक टीम काठमांडू भेजी।
चीन की ओर से भेजी गई मदद में टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाने के पैकेट और आपातकालीन राहत किट शामिल हैं। काठमांडू पहुंचने के बाद यह सामान नेपाल सरकार को सौंप दिया जाएगा।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट पर हुए बाढ़-भूस्खलन के बाद 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता बताए गए हैं। इनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।
चीन ने संबंधित देशों के दूतावासों को सूचना दे दी है और लापता लोगों के परिजनों की मदद के लिए 24 घंटे चलने वाली दो अंग्रेजी भाषा की हेल्पलाइन भी शुरू की हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे देशों से मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि नदियों के निचले इलाकों से सैकड़ों शव मिले हैं और लंबे समय तक पानी में रहने के कारण उनके जल्दी खराब होने का खतरा है।
खनाल ने बताया कि नेपाल में शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा सीमित है। इसलिए सरकार विदेशी देशों से फ्रीजर उपलब्ध कराने में सहयोग मांग रही है।
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई है। 2,498 लोग अब भी लापता हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार सुबह 9 बजे जारी अपने खोज, बचाव और राहत अभियान के अपडेट में दी।
अमेरिकी सरकार ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए 36 लाख डॉलर से ज्यादा की अतिरिक्त मानवीय सहायता देने का ऐलान किया है। यह रकम भारतीय मुद्रा में करीब 34.4 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि इस मदद के तहत 10,000 बाढ़ पीड़ितों को तीन महीने तक खाद्य सामग्री मुहैया कराई जाएगी। इससे पहले अमेरिका 5 लाख डॉलर (करीब 4.8 करोड़ रुपये) की मदद देने का ऐलान कर चुका है।
नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया
नेपाल में अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजोक्ट्स में काम करने वाले करीब 898 कर्मचारी अब भी लापता हैं। इनमें से करीब 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।
नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने शनिवार देर रात बताया कि त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे बचाव अभियान में कुछ सफलता मिली है। बाढ़ के बाद यह सुरंग मिट्टी और गाद से पूरी तरह भर गई थी।
उन्होंने बताया कि बचावकर्मी खुदाई करने वाली मशीनों से मिट्टी और गाद हटा रहे हैं। टीम ने सुरंग के ऊपरी हिस्से में 6 इंच का छेद भी किया है। शुरुआती जांच में सुरंग के अंदर कोई मलबा नहीं मिला। इसके बाद बचावकर्मियों ने सुरंग में हवा पहुंचाई और अंदर रोशनी और आवाज भी भेजी, लेकिन अभी तक अंदर मौजूद किसी व्यक्ति से संपर्क नहीं हो पाया है।
अब बचाव दल इसी छेद को बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके जरिए बचावकर्मी सुरंग के अंदर पहुंचने की कोशिश करेंगे।
नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच बचावकर्मियों ने तीन दिन बाद मलबे के नीचे से 6 साल की बच्ची को जिंदा निकाल लिया। यह घटना रसुवा जिले के तिमुरे इलाके में हुई।
बच्ची की तलाश में जुटी सशस्त्र पुलिस बल की एक टीम को मलबे के नीचे से रोने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद बचावकर्मियों ने मलबा हटाकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला। बच्ची को आगे के इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि सरकार पूरी क्षमता से राहत, बचाव और पुनर्वास अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि हर प्रभावित नागरिक की जान बचाना और उसका पुनर्वास सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
शाह के मुताबिक, अब तक 7,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे 279 कर्मचारी भी शामिल हैं। अभियान में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 18,708 जवान और 16 हेलिकॉप्टर जुटे हैं। भारत और चीन के विशेषज्ञ भी मौके पर मदद कर रहे हैं।
नेपाल में तबाही के तीन दिन बाद शनिवार को ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। तिब्बत में एक टूर गाइड ग्रुप ने ऊंचाई से इसे रिकॉर्ड किया था। वीडियो में बर्फ और चट्टानों से बना करीब 800 मीटर लंबा ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर घाटी में गिरता दिखाई दे रहा है।
ग्लेशियर टूटने के बाद बड़े पैमाने पर मलबा और पानी नीचे की ओर बहा। इसके साथ लैंडस्लाइड हुआ और अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में भारी तबाही मचाई।
भारत के काठमांडू स्थित दूतावास ने नेपाल में मारे गए लोगों के शवों की पहचान को लेकर प्रेस रिलीज जारी की है। नेपाल सरकार अज्ञात मृतकों की तस्वीरें और उनके बारे में जानकारी जारी कर रही है, जिसे एक आधिकारिक लिंक पर देखा जा सकता है।
दूतावास ने कहा कि वह नेपाल पुलिस समेत स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि पहचान के बाद भारतीय नागरिकों के शव उनके परिजनों को सौंपे जा सकें। दूतावास ने इस संबंध में आगे की जानकारी नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर साझा करने की बात कही है।
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