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पूरे देश मे किसिंग कार के नाम से ग्वालियर का ये वीडियो वायरल हो गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ₹5500 चालान भी काट दिया और युवक से कार में लगे लिपस्टिक के निशान भी साफ करवाए।

आदित्य ने इन निशानों को बनाने के लिए करीब 900 रुपए की लिप्सटिक खर्च की। इसके बाद उसने इसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दिया। रील ने रफ्तार पकड़ी और एक ही दिन में करीब 55 लाख व्यूज बटोर लिए। जितनी तेजी से रील वायरल हुई, उतनी ही तेजी से यह यातायात पुलिस की नजर में भी आ गई।
सवाल 2- युवक ने कार पर इतने किस क्यों करवाए?
जवाब- आदित्य ने पुलिस को बताया कि वह इंस्टाग्राम पर रील बनाता है, और इस बार कुछ अलग हटकर कंटेंट बनाकर ज्यादा से ज्यादा व्यूज बटोरना चाहता था। उसके मुताबिक यह आइडिया एक विदेशी सोशल मीडिया ट्रेंड से प्रभावित होकर आया, जिसे उसकी गर्लफ्रेंड ने सुझाया।
यही वजह है कि यह कोई अचानक हुई शरारत नहीं लगती। निशान बनने के बाद पैसे खर्च कर रंग को गहरा और स्थायी कराना बताता है कि यह सोच-समझकर बनाया गया एक वायरल कंटेंट एक्सपेरिमेंट था। यह कामयाब भी हुआ, रील को चौबीस घंटे में 55 लाख से ज्यादा व्यूज मिल गए। लेकिन मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद आदित्य ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट ही ब्लॉक कर दिया, जिस पर करीब 2,952 फॉलोअर्स और 64 पोस्ट थे।
सवाल 3- रील में पुलिस को आखिर गलत क्या लगा?
जवाब- पुलिस की नजर में वीडियो में दो बातें सबसे पहले आईं- खतरनाक ड्राइविंग और कार के मूल रंग-रूप में किया गया बदलाव।
यातायात पुलिस के मुताबिक, वीडियो में कार सार्वजनिक सड़क पर बेहद तेज रफ्तार से दौड़ती नजर आ रही थी। साथ ही उसकी पूरी बॉडी पर लिपस्टिक के निशान साफ दिख रहे थे, जो सामान्य कार से अलग नजारा था और पुलिस के मुताबिक वाहन में किए गए बदलाव की ओर इशारा कर रहा था।
ग्वालियर पुलिस ट्रैफिक उल्लंघन और खतरनाक ड्राइविंग पकड़ने के लिए ऑपरेशन ईगल नाम से अभियान चला रही है। इसके तहत सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे वीडियो पर भी नजर रखी जाती है। इसी अभियान में यह वीडियो पुलिस की नजर में आया। वीडियो ग्वालियर के सिटी सेंटर इलाके में शूट हुआ था और कार दो दिन तक शहर की सड़कों पर घूमती रही।
इसके बाद नंबर MP07 CC 9452 के आधार पर टीम ने कार की पहचान की और उसे थाटीपुर इलाके से बरामद कर यातायात थाने ले आई।
कार मालिक आदित्य सिकरवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उसने अपनी गलती मानी और थाने में ही कार पर लगे लिपस्टिक के निशान पानी से साफ किए। लेकिन जांच यहीं खत्म नहीं हुई। कार की जांच में दो और गड़बड़ियां सामने आईं, जिनकी वजह से कुल ₹5,500 का चालान काटा गया।
सवाल 4- ₹5,500 का जुर्माना आखिर किस बात का लगा?
जवाब- जुर्माना सिर्फ कार को किसेस से ढंकने पर नहीं, बल्कि जांच के दौरान मिलीं कुल चार अलग-अलग गड़बड़ियों को मिलाकर लगा है।
धारा 114(2)/177- गाड़ी पर स्टीकर या इसी तरह की चीजें लगाकर उसे गैरकानूनी ढंग से मॉडिफाई करना। यही वह धारा है जो सीधे कार की बॉडी पर किए गए बदलाव से जुड़ती है- लिपस्टिक के निशानों को बनाने पर खर्च हुए ₹900 इसी वजह से महज सजावट नहीं, कानूनी तौर पर 'मॉडिफिकेशन' माने गए।
धारा 100(2)/177- गाड़ी के शीशों पर लगी ब्लैक फिल्म। यह वायरल वीडियो से सीधे जुड़ा मसला नहीं था, इससे पता चलता है कि जांच के दौरान कार में एक और, बिल्कुल अलग किस्म की गड़बड़ी भी पकड़ में आई।
धारा 3/181- ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा उल्लंघन।
धारा 184- सार्वजनिक सड़क पर खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, वही हिस्सा जो वीडियो में तेज रफ्तार से दौड़ती कार के तौर पर सामने आया था।
इन चारों धाराओं के तहत मिलाकर कुल ₹5,500 का समन शुल्क वसूला गया। यानी असल कहानी सिर्फ 'किसिंग कार' की नहीं थी- वायरल होने के बाद हुई जांच में गाड़ी की तीन और गड़बड़ियां भी एक साथ पकड़ में आ गईं। ग्वालियर यातायात थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी के मुताबिक कार्रवाई के बाद आदित्य ने अपनी गलती मान ली और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कही।
सवाल 5- गाड़ी में मॉडिफिकेशन को लेकर क्या कानून है, आप क्या नहीं कर सकते?
जवाब- गाड़ी को लेकर हर क्रिएटिव आइडिया कानूनी नहीं होता…
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 52(1) साफ कहती है कि जिस स्पेसिफिकेशन के साथ कंपनी ने गाड़ी बनाई और रजिस्टर्ड कराई है, उसमें बिना अनुमति बदलाव गैरकानूनी है।
इसी दायरे में आने वाली आम गलतियां…
गाड़ी की बॉडी में बदलाव- वाहन की मूल बनावट या उसके दर्ज स्पेकिफिकेशंस में ऐसा बदलाव, जो नियमों के दायरे में आता है, बिना जरूरी अनुमति नहीं किया जा सकता। ग्वालियर के मामले में पुलिस ने कार की बॉडी पर किए गए बदलाव को चालान का एक आधार माना।
कलर, इंजन या फ्यूल टाइप बदलना- गाड़ी का रंग बदलवाना हो या इंजन-फ्यूल टाइप में कोई तब्दीली, दोनों के लिए पहले स्थानीय RTO से लिखित अनुमति लेकर RC में दर्ज कराना अनिवार्य है, वरना यह धारा 52 का उल्लंघन माना जाएगा।
चेसिस या इंजन से छेड़छाड़- गाड़ी की बुनियादी बनावट (चेसिस) या इंजन में कोई भी बदलाव सीधे गाड़ी की जब्ती तक ले जा सकता है, चाहे मकसद परफॉर्मेंस बढ़ाना हो या सिर्फ दिखावा।
शीशों पर काली फिल्म- नई कार में कंपनी जो कांच लगाकर देती है, उसमें पहले से ही तय मात्रा में रोशनी अंदर आने की व्यवस्था होती है। नियम के मुताबिक आगे और पीछे के शीशे से कम से कम 70% और साइड के शीशों से कम से कम 50% रोशनी गुजरनी चाहिए। कार खरीदने के बाद शीशों के ऊपर अलग से काली या रंगीन फिल्म चिपकाना अपराध है।
बाकी आम गलतियां, जो रील/वीडियो बनाने के दौरान अक्सर हो जाती हैं…
खतरनाक ड्राइविंग/स्टंट- सड़क पर इस तरह वाहन चलाना जिससे दूसरे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़े, धारा 184 के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। पहली बार में जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान है।
ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी गड़बड़ी- लाइसेंस साथ न होना, एक्सपायर होना या न बना होना, धारा 3/181 के तहत अलग से चालान का आधार बनता है।
हेलमेट या सीट बेल्ट न लगाना- मध्य प्रदेश में हेलमेट न पहनने पर जुर्माना हाल में बढ़ाकर ₹1,000 किया जा चुका है।
गलत दिशा में वाहन चलाना या रेड लाइट जंप करना- इन पर भी अलग से चालान का प्रावधान है, राशि उल्लंघन और वाहन की श्रेणी के हिसाब से तय होती है।
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