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जिसका व्यापारी संगठन पुरजोर विरोध कर रहे हैं। अरेरा कॉलोनी सहित शहर के तमाम प्रमुख बाजार संघ इस कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हो गए हैं।

व्यापारी संगठनों की साफ मांग है कि जब तक सरकार मिश्रित भूमि उपयोग यानी 'मिक्स्ड लैंड यूज़' नीति को पूरी तरह से लागू नहीं कर देती, तब तक किसी भी तरह की दंडात्मक या सीलिंग की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
दरअसल, अरेरा कॉलोनी जैसे कई प्रमुख इलाकों में वर्षों से मकानों के निचले हिस्से और ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें और दफ्तर संचालित हो रहे हैं। व्यापारियों का तर्क है कि मास्टर प्लान में आवश्यक संशोधन करके इन क्षेत्रों को 'मिक्स्ड लैंड यूज़' का दर्जा दिया जाए, ताकि इन गतिविधियों को नियमित (regularize) किया जा सके और व्यापारियों का रोजगार प्रभावित न हो।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि नीति लागू होने से पहले सीलिंग या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो हजारों व्यापारियों और कर्मचारियों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आग्रह है कि सरकार पहले नीति को प्रभावी ढंग से लागू करे और उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई पर विचार करे, ताकि व्यापार और आजीविका दोनों सुरक्षित रह सकें।
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